मध्य प्रदेश

भोजशाला फैसले को एक महीना, फिर भी SOP का इंतजार; याचिकाकर्ताओं ने सरकार से मांगा हस्तक्षेप

भोजशाला को मंदिर घोषित करने वाले हाईकोर्ट फैसले के एक माह बाद भी SOP जारी नहीं हुई है। याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग की है।

धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को एक माह पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक पुरातत्व विभाग की ओर से संचालन संबंधी कोई स्पष्ट मानक प्रक्रिया (SOP) जारी नहीं की गई है। इससे भोजशाला के भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में संभावित याचिका का हवाला दिया जा रहा है, जबकि अब तक शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़े याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की गई है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी पुरातत्व विभाग की ओर से किसी प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।

उन्होंने मांग की है कि पूर्व में भोजशाला परिसर की खुदाई के दौरान प्राप्त हुई प्रतिमाओं को पुनः भोजशाला में स्थापित किया जाए और अदालत के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना था मंदिर

गौरतलब है कि 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया था। फैसले के बाद परिसर में नमाज की प्रक्रिया बंद हो गई और अब प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जा रही है। निर्णय के बाद आए मंगलवार और शुक्रवार को विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी।

सरस्वती लोक परियोजना को लेकर भी बढ़ी उम्मीदें

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही धार में “सरस्वती लोक” विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं, जिसे राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में अब परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस परियोजना को गति मिलने की संभावना और बढ़ गई है।

मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की कवायद

भोजशाला से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत लंदन के संग्रहालय में संरक्षित मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास भी जारी हैं। इस दिशा में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर सक्रिय रूप से प्रयास कर रही हैं। भोजशाला से जुड़े संगठनों का कहना है कि प्रतिमा की वापसी सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

SOP जारी नहीं होने से बनी हुई है अनिश्चितता

हाईकोर्ट के फैसले के बाद श्रद्धालुओं को पूजा का अधिकार तो मिल गया है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था, धार्मिक गतिविधियों, पुरातात्विक संरक्षण और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं। ऐसे में याचिकाकर्ताओं और श्रद्धालुओं की नजर अब राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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