सोनाली चिकन क्यों बन रहा है लोगों की पहली पसंद? देसी स्वाद, कम फैट और बेहतर प्रोटीन का अनोखा कॉम्बिनेशन
सोनाली चिकन ब्रायलर और देसी चिकन के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन रहा है। जानिए इसकी ब्रीड, पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और किसानों के लिए इसके फायदे।

बाजार में चिकन की बढ़ती मांग और हेल्दी विकल्पों की तलाश के बीच ‘सोनाली चिकन’ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह खास ब्रीड स्वाद, पोषण और कीमत के मामले में ब्रायलर और देसी चिकन के बीच एक संतुलित विकल्प मानी जाती है। कम फैट, बेहतर प्रोटीन और देसी चिकन जैसे स्वाद के कारण फिटनेस प्रेमियों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक इसकी मांग बढ़ रही है।
क्या है सोनाली चिकन?
सोनाली चिकन एक विशेष क्रॉस-ब्रीड है, जिसे Rhode Island Red और Fayoumi नस्लों को मिलाकर तैयार किया गया है। इसके सुनहरे-पीले पंखों की वजह से इसे “सोनाली” नाम दिया गया है। यह दिखने और स्वाद में काफी हद तक देसी मुर्गे जैसा माना जाता है।
ब्रायलर और देसी चिकन से कैसे है अलग?
सोनाली चिकन में ब्रायलर की तुलना में पेट और त्वचा के आसपास फैट काफी कम पाया जाता है। यही वजह है कि इसका मांस अधिक लीन (Lean Meat) माना जाता है। वहीं इसका स्वाद और टेक्सचर देसी चिकन के करीब माना जाता है, जिससे यह दोनों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है।
न्यूट्रिशन के मामले में कितना फायदेमंद?
100 ग्राम सोनाली चिकन में औसतन:
- 165-175 कैलोरी
- 20-23 ग्राम प्रोटीन
- 7-9 ग्राम फैट
- 2-2.5 ग्राम सैचुरेटेड फैट
- 70-80 मिग्रा कोलेस्ट्रॉल
- आयरन, कैल्शियम और विटामिन B12 की उपयोगी मात्रा
मौजूद होती है। यही कारण है कि इसे हाई-प्रोटीन और अपेक्षाकृत कम फैट वाला विकल्प माना जाता है।
फिटनेस प्रेमियों के बीच क्यों लोकप्रिय?
कम फैट और बेहतर प्रोटीन प्रोफाइल के कारण जिम जाने वाले और वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोग सोनाली चिकन को पसंद करते हैं। यह मांसपेशियों के विकास में मदद कर सकता है और अतिरिक्त कैलोरी सेवन को सीमित रखने में सहायक हो सकता है।
रिसर्च क्या कहती है?
कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि कम फैट और बेहतर लिपिड प्रोफाइल वाला चिकन हृदय स्वास्थ्य के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि किसी भी प्रकार के भोजन के स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की कुल डाइट, जीवनशैली और सेवन की मात्रा पर भी निर्भर करते हैं।
किसानों के लिए भी फायदे का सौदा
सोनाली चिकन केवल उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी लाभदायक माना जाता है। यह गर्म और आर्द्र जलवायु में आसानी से अनुकूल हो जाता है और इसे पालने में अपेक्षाकृत कम संसाधनों की जरूरत पड़ती है। हालांकि इसकी वृद्धि दर ब्रायलर चिकन से थोड़ी धीमी होती है।
अंडे भी होते हैं पौष्टिक
सोनाली मुर्गी के एक अंडे में औसतन:
- 70-75 कैलोरी
- 6-7 ग्राम प्रोटीन
- लगभग 5 ग्राम फैट
पाया जाता है। संतुलित आहार मिलने पर अंडों की पोषण गुणवत्ता और बेहतर हो सकती है।
क्या सोनाली चिकन बेहतर विकल्प है?
यदि आप देसी चिकन जैसा स्वाद चाहते हैं लेकिन उसकी ऊंची कीमत नहीं चुकाना चाहते, तो सोनाली चिकन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कम फैट, अच्छी प्रोटीन मात्रा और किफायती कीमत इसकी प्रमुख खूबियां हैं। हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ को संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर ही सेवन करना बेहतर माना जाता है।
नोट: पोषण संबंधी जरूरतें व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग हो सकती हैं। किसी विशेष डाइट या स्वास्थ्य स्थिति में बदलाव से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लेना उचित है।




