बढ़ती गर्मी का गर्भ में पल रहे बच्चों पर खतरा! रिसर्च में ठिगनेपन के बढ़ते मामलों की चेतावनी
नई रिसर्च में दावा किया गया है कि अत्यधिक गर्मी और उमस गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है। जानिए स्टंटिंग का खतरा क्यों बढ़ रहा है और इससे बचाव के उपाय।

जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह गर्भ में पल रहे बच्चों की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि अत्यधिक गर्मी और उमस गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है, जिससे बच्चे के शारीरिक विकास में बाधा आने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन के अनुसार, यदि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो दक्षिण एशिया में बच्चों में ठिगनेपन (स्टंटिंग) के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।
रिसर्च में सामने आया गर्मी और स्टंटिंग का संबंध
जर्नल Science Advances में प्रकाशित अध्ययन में दक्षिण एशिया के लगभग दो लाख बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी और उमस के संपर्क में रहने वाली महिलाओं के बच्चों में स्टंटिंग का खतरा अधिक देखा गया। अध्ययन में शामिल अधिकांश बच्चे भारत से थे।
क्या है स्टंटिंग और क्यों है चिंता का विषय?
स्टंटिंग एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के अनुसार सामान्य से कम रह जाती है। यह केवल शारीरिक विकास को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक विकास और सीखने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण और गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
गर्भावस्था में गर्मी और उमस कैसे पहुंचाती है नुकसान?
अत्यधिक गर्म और उमस भरे वातावरण में रहने से गर्भवती महिलाओं में डिहाइड्रेशन, थकान और हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ सकता है। शरीर को तापमान नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे रक्त संचार प्रभावित हो सकता है। इसका असर प्लेसेंटा तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह पर पड़ सकता है, जिससे गर्भस्थ शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता।
आखिरी तिमाही में सबसे अधिक जोखिम
अध्ययन के अनुसार गर्भावस्था की अंतिम तिमाही, यानी 28वें से 40वें सप्ताह के बीच, बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसी दौरान यदि मां अत्यधिक गर्मी और उमस के संपर्क में रहती है तो भ्रूण की वृद्धि प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।
किन क्षेत्रों में अधिक खतरा?
शोध में बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों को अधिक जोखिम वाला बताया गया है। इन इलाकों में गर्मी और आर्द्रता का स्तर अपेक्षाकृत अधिक रहता है, जिससे गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन का अगली पीढ़ी पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अब जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल पर्यावरण या मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस समस्या को सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौती दोनों के रूप में देखने की जरूरत है।
बचाव के लिए क्या करें?
गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक गर्मी और उमस से बचाना जरूरी है। इसके लिए:
- पर्याप्त पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।
- दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।
- ठंडे और हवादार वातावरण में रहें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
- हीटवेव अलर्ट के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें।
नोट: यह लेख एक शोध अध्ययन पर आधारित है। गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी स्वास्थ्य समस्या या सलाह के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ या योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।




