छत्तीसगढ़

आत्मसमर्पित नक्सलियों की सफल माइक्रोसर्जरी, संगठन के दबाव में करवाई गई नसबंदी को किया रिवर्स

बस्तर के महारानी अस्पताल में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों की रिवर्स वासेक्टॉमी माइक्रोसर्जरी की गई। दो चरणों में 73 सफल ऑपरेशन हुए, जिससे कई परिवारों को नई उम्मीद मिली।

जगदलपुर। बस्तर में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में एक अनोखी और मानवीय पहल सामने आई है। महारानी अस्पताल में आयोजित विशेष सर्जिकल शिविर में उन पूर्व नक्सलियों की रिवर्स वासेक्टॉमी (नसबंदी रिवर्सल) जैसी जटिल माइक्रोसर्जरी की गई, जिन्हें कभी नक्सली संगठन के दबाव में नसबंदी करवानी पड़ी थी। इस पहल से कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लौट रही हैं।

महारानी अस्पताल में लगा विशेष सर्जिकल शिविर

बस्तर संभाग के महारानी अस्पताल में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य उन लोगों को सामान्य पारिवारिक जीवन की ओर लौटने का अवसर देना था, जो नक्सली संगठन में रहने के दौरान मजबूरी में नसबंदी कराने को विवश हुए थे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस शिविर में जटिल माइक्रोसर्जरी तकनीक के माध्यम से रिवर्स वासेक्टॉमी ऑपरेशन किए।

दो चरणों में 73 सफल सर्जरी

अधिकारियों के अनुसार अभियान के तहत अब तक दो चरणों में कुल 73 सफल सर्जरी की जा चुकी हैं। देशभर से आए विशेषज्ञ सर्जनों ने स्वैच्छिक सेवाएं देते हुए इन ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चिकित्सकों का कहना है कि रिवर्स वासेक्टॉमी एक अत्यंत जटिल माइक्रोसर्जिकल प्रक्रिया होती है, जिसके लिए विशेष कौशल और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।

पुनर्वास के साथ लौट रही पारिवारिक खुशियां

इस पहल के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। सर्जरी के बाद कुछ परिवारों में बच्चों की किलकारियां गूंजने लगी हैं, जिससे वर्षों से अधूरे पारिवारिक सपने पूरे होते दिखाई दे रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने इस पहल को जीवन बदलने वाला कदम बताते हुए प्रशासन और चिकित्सा टीमों का आभार जताया है।

मानवीय सेवा का अनूठा उदाहरण

शिविर में शामिल चिकित्सकों ने इस अभियान को केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मिशन बताया। उनका कहना है कि इससे उन लोगों को नया जीवन मिला है, जो लंबे समय तक हिंसा और संघर्ष के माहौल में रहे।

पुनर्वास मॉडल की बड़ी सफलता

पुलिस और प्रशासन इस पहल को बस्तर के पुनर्वास मॉडल की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मानजनक और सामान्य जीवन प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। यह पहल न केवल चिकित्सा सहायता का उदाहरण है, बल्कि समाज में पुनर्स्थापन और विश्वास बहाली की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नई उम्मीद का संदेश

बस्तर में बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों के लिए यह अभियान नई उम्मीद लेकर आया है। पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सहयोग के माध्यम से ऐसे परिवारों को फिर से सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button