ओलिंपिक गोल्ड जीतकर भी अनजान रहीं मार्गरेट एबॉट, 70 साल बाद दुनिया को पता चला सच
कोलकाता में जन्मीं मार्गरेट एबॉट 1900 पेरिस ओलिंपिक में गोल्ड जीतने वाली दुनिया की पहली महिला बनीं, लेकिन उन्हें जीवनभर अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का पता नहीं चला।

खेल जगत में कई ऐसे किस्से हैं जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर भी लंबे समय तक लोगों की नजरों से ओझल रहते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कहानी है गोल्फ खिलाड़ी मार्गरेट एबॉट की, जो दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन बनीं, लेकिन उन्हें अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी कभी नहीं मिल सकी।
15 जून 1878 को जन्मीं मार्गरेट एबॉट का नाम आज ओलिंपिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हालांकि, अपने जीवनकाल में वह यह मानती रहीं कि उन्होंने सिर्फ एक सामान्य गोल्फ प्रतियोगिता जीती थी।
कोलकाता में हुआ था जन्म
मार्गरेट एबॉट का जन्म 15 जून 1878 को भारत के कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उनके पिता चार्ल्स पैटरसन एबॉट एक अमेरिकी व्यवसायी थे, जो ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारत में व्यापार करते थे।
पिता के निधन के बाद परिवार अमेरिका लौट गया और शिकागो में बस गया। यहीं से मार्गरेट की गोल्फ यात्रा शुरू हुई। उनकी मां मैरी एबॉट एक लेखिका और संपादक थीं, जिन्होंने बेटी को खेल और शिक्षा दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पेरिस में देखा एक विज्ञापन और बदल गया इतिहास
1890 के दशक के अंत में मार्गरेट अपनी मां के साथ कला की पढ़ाई के लिए पेरिस चली गईं। वहां उन्होंने गोल्फ खेलना जारी रखा। एक दिन उनकी नजर अखबार में प्रकाशित एक गोल्फ प्रतियोगिता के विज्ञापन पर पड़ी। यह प्रतियोगिता 4 अक्टूबर 1900 को पेरिस के निकट कॉम्पिएन गोल्फ क्लब में आयोजित की जानी थी। मार्गरेट और उनकी मां दोनों ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया।
अनजाने में बन गईं पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन
1900 का पेरिस ओलिंपिक आधुनिक ओलिंपिक खेलों से काफी अलग था। उस समय प्रतियोगिताएं पेरिस में आयोजित विश्व मेले (World’s Fair) का हिस्सा थीं और आयोजन में काफी अव्यवस्था थी। कई खिलाड़ियों की तरह मार्गरेट एबॉट को भी यह जानकारी नहीं थी कि जिस प्रतियोगिता में वे भाग ले रही हैं, वह ओलिंपिक कार्यक्रम का हिस्सा है। प्रतियोगिता में मार्गरेट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि उनकी मां मैरी सातवें स्थान पर रहीं। इसी जीत के साथ मार्गरेट दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता बन गईं।
जीवनभर नहीं जान सकीं अपनी उपलब्धि
मार्गरेट एबॉट ने पूरी जिंदगी यह समझते हुए बिताई कि उन्होंने केवल एक स्थानीय गोल्फ प्रतियोगिता जीती थी। उन्हें कभी यह पता नहीं चला कि उनकी जीत ओलिंपिक इतिहास का हिस्सा बन चुकी है। 10 जून 1955 को उनका निधन हो गया और उनके साथ यह रहस्य भी दफन हो गया।
70 साल बाद सामने आई सच्चाई
कई दशक बाद अमेरिकी ओलिंपिक इतिहास की शोधकर्ता और अधिकारी पाउला वेल्च ने न्यूयॉर्क स्थित ओलिंपिक मुख्यालय में लगी मार्गरेट एबॉट की तस्वीर देखी। उन्होंने पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच की। शोध के बाद यह तथ्य सामने आया कि मार्गरेट एबॉट वास्तव में ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला थीं। बाद में 1984 में उनके बेटे फिलिप एबॉट ने अपनी मां की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर लेख लिखकर दुनिया को इस अनसुनी कहानी से परिचित कराया।
महिलाओं के खेल इतिहास में मील का पत्थर
जिस दौर में महिलाओं की खेलों में भागीदारी सीमित थी, उस समय मार्गरेट एबॉट ने इतिहास रच दिया। भले ही उन्हें अपनी उपलब्धि का एहसास नहीं हुआ, लेकिन उनकी जीत ने महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय खेलों के नए रास्ते खोले। आज मार्गरेट एबॉट का नाम खेल इतिहास की उन महान हस्तियों में शामिल है, जिन्होंने अनजाने में ही दुनिया बदलने वाला अध्याय लिख दिया।




