गन्ना किसानों की बदली तकदीर! 9 साल में 3.22 लाख करोड़ का भुगतान, यूपी बना देश में नंबर-1
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को पिछले नौ वर्षों में 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। समय पर भुगतान, गन्ना मूल्य वृद्धि और डिजिटल योजनाओं से किसानों की आय और खुशहाली बढ़ी है।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। पिछले नौ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में उठाए गए कदमों ने कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है, जो देश के किसी भी राज्य में गन्ना किसानों को किए गए भुगतान में सबसे अधिक माना जा रहा है।
3.22 लाख करोड़ रुपये का भुगतान बना नया रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि बीते नौ वर्षों में गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह राशि लाखों किसान परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार बनी है। एक समय था जब किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब समयबद्ध भुगतान व्यवस्था ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है।
कभी बकाया भुगतान से परेशान थे किसान
प्रदेश में एक दौर ऐसा भी था जब चीनी मिलों पर किसानों का भुगतान लंबे समय तक बकाया रहता था। गन्ने से लदी ट्रॉलियां मिलों के बाहर खड़ी रहती थीं और किसान आर्थिक संकट से जूझते थे। लेकिन सरकार की नीतियों और निगरानी के चलते अब हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समय पर भुगतान मिलने से किसानों के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी से किसानों को राहत
पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। सरकार का मानना है कि यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका सीधा लाभ लाखों गन्ना उत्पादक किसानों को मिलेगा।
देश में सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक बना उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य बन चुका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती, उन्नत सिंचाई तकनीक और मिलों की कार्यक्षमता में सुधार ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। राज्य ने औसत चीनी परता (रिकवरी) के मामले में भी कई अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
फार्मर आईडी और डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
सरकार ने किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया है। वर्ष 2024-25 से मार्च 2026 तक प्रदेश में 2.03 करोड़ फार्मर आईडी जारी की गई हैं। इसके जरिए सरकारी सहायता और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हुई है।
किसान क्रेडिट कार्ड से मिला आर्थिक संबल
किसान क्रेडिट कार्ड और आसान कृषि ऋण जैसी योजनाओं ने किसानों को साहूकारों पर निर्भरता कम करने में मदद की है। अब किसान खाद, बीज और सिंचाई जैसी जरूरतों के लिए आसानी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर पा रहे हैं।
चुनौतियां अब भी बरकरार
हालांकि कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित मौसम और फसलों में बढ़ती बीमारियां अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए आधुनिक तकनीकों, जल संरक्षण और कृषि अनुसंधान पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता होगी।




