उत्तर प्रदेशराज्य

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: चोरी के आरोप से SIT जांच तक, जानिए कैसे बढ़ता गया पूरा मामला

अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में SIT जांच शुरू हो गई है। जानिए ऑडिट में गड़बड़ी की आशंका से लेकर कर्मचारियों की गिरफ्तारी और राजनीतिक विवाद तक पूरा घटनाक्रम।

अयोध्या. अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट में सामने आई अनियमितताओं की आशंका, दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी, लाखों रुपये की बरामदगी और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SIT गठन ने इस पूरे प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया है। विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार निष्पक्ष जांच का भरोसा दिला रही है।

ऑडिट के दौरान सामने आई गड़बड़ी की आशंका

जून की शुरुआत में राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र में जमा राशि और अन्य वस्तुओं के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान एक कर्मचारी की गतिविधियां संदिग्ध दिखाई दीं, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई।

अखिलेश यादव के बयान से राजनीतिक हुआ मामला

7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया। उन्होंने योगी सरकार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो इस तरह के आरोप सामने नहीं आते। अखिलेश के बयान के बाद मामला तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने भी सरकार से जवाब मांगा और निष्पक्ष जांच की मांग की।

आम आदमी पार्टी ने भी सरकार को घेरा

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में चढ़ावे की कथित चोरी को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

बीजेपी ने भी माना, जांच जारी

10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर SIT का गठन

13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन की घोषणा की। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया। SIT में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। टीम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी से मामला हुआ और गंभीर

जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार कुछ रकम अलमारी में और कुछ गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी।

इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच कथित असमानता की भी जांच कर रही हैं।

संपत्तियों में वृद्धि पर भी जांच एजेंसियों की नजर

सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कर्मचारियों ने हाल के समय में बड़ी संपत्तियां खरीदी हैं। एक कर्मचारी द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन खरीदने और दूसरे द्वारा लाखों रुपये का प्लॉट लेने की जानकारी जांच एजेंसियों के रडार पर है।

पांच दिन में दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे। हालांकि उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है।

क्यों बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय?

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की राशि से जुड़े किसी भी विवाद का प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन जाता है। यही वजह है कि यह मामला अब विपक्ष, सरकार, मंदिर ट्रस्ट और आम श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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