राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज, BJP की तीसरी सीट पर नजर; कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। BJP की रणनीति पर नजरें टिकी हैं, जबकि कांग्रेस क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच विधायकों को एकजुट रखने में जुटी है।

भोपाल. मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर भाजपा की संभावित रणनीति की हो रही है। पार्टी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटी हुई है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल नामांकन दाखिल कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन मैदान में हैं। दोनों दलों ने शनिवार को विधायक दल की बैठक कर मतदान प्रक्रिया और चुनावी रणनीति पर चर्चा की।
तीसरी सीट पर BJP की रणनीति बनी रहस्य
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी फिलहाल दो सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में तीसरी सीट को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय नेतृत्व के संकेत मिलते ही पार्टी अंतिम समय में बड़ा फैसला ले सकती है।
अंतिम दिन हो सकता है बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि भाजपा आखिरी समय में कोई चौंकाने वाला कदम उठा सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय भी पहले संकेत दे चुके हैं कि यदि तीसरा उम्मीदवार उतारा गया तो उसे जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकी जाएगी।
कांग्रेस को सता रही क्रॉस वोटिंग की चिंता
कांग्रेस खेमे में चुनाव को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विधायक दल की बैठक में प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन मौजूद रहीं, लेकिन पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर चिंता बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व लगातार विधायकों के संपर्क में है और किसी भी तरह की टूट-फूट को रोकने की कोशिश कर रहा है।
क्या दोहराया जाएगा 2016 का राजनीतिक दांव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा यदि तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो यह 2016 की रणनीति की याद दिला सकता है। उस समय भाजपा ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया था। हालांकि जीत नहीं मिली थी, लेकिन इस बार बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के कारण संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल राज्यसभा चुनाव के अंतिम चरण में सभी की नजरें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हुई हैं। यदि पार्टी तीसरे उम्मीदवार की घोषणा करती है, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है।




