भोपाल से अलवर तक ATS का शिकंजा, आतंकी नेटवर्क मामले में तीसरी गिरफ्तारी; सोशल मीडिया से युवाओं को जोड़ने की कोशिश
एमपी ATS ने आतंकी साजिश मामले में राजस्थान के अलवर से तीसरे आरोपी शाकिर मेव को गिरफ्तार किया है। जांच में मध्यप्रदेश में नेटवर्क फैलाने, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने और विदेशी संपर्कों के संकेत मिले हैं।

भोपाल/अलवर. मध्यप्रदेश एटीएस (ATS) ने आतंकी साजिश से जुड़े एक संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार शाकिर मेव कथित नेटवर्क में सेकंड हेड कमांडर की भूमिका निभा रहा था और संगठनात्मक गतिविधियों में उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी बताई जा रही है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद 20 जून तक रिमांड पर भेजा गया है।
इससे पहले भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से गिरफ्तार मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क, डिजिटल संपर्कों और संभावित विदेशी कनेक्शन की गहन पड़ताल कर रही हैं।
मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने की थी कथित योजना
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि फराज को कथित तौर पर विदेशी हैंडलर्स द्वारा मध्यप्रदेश में नेटवर्क तैयार करने, युवाओं को जोड़ने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का जिम्मा सौंपा गया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि उसे कथित रूप से “लश्कर कमांडर” नाम की नई पहचान दी गई थी, जिसके जरिए वह ऑनलाइन नेटवर्क का विस्तार करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
टेलीग्राम और वाट्सएप के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश
एटीएस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि संदिग्ध गतिविधियों के लिए टेलीग्राम और वाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि सोशल मीडिया ग्रुप्स के माध्यम से युवाओं को जोड़ा जा रहा था और विभिन्न प्रकार की सामग्री साझा की जाती थी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि फराज पिछले करीब चार वर्षों से डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय था। अब उसके ऑनलाइन नेटवर्क, चैट रिकॉर्ड, संपर्क सूत्रों और डिजिटल गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है।
देवबंद से पकड़ा गया था साथी नईम
फराज की निशानदेही पर उसके कथित सहयोगी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि नईम की गिरफ्तारी नेटवर्क की संरचना और उसके संभावित विस्तार को समझने में अहम साबित हो सकती है।
दोनों आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां कथित विदेशी संपर्क, फंडिंग, डिजिटल नेटवर्क और अन्य संभावित गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं।
भोपाल में तड़के हुई थी कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे एटीएस की टीम ने भोपाल के काजी कैंप स्थित फराज के घर पर दबिश दी थी। पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा गया था। टीम ने घर को चारों ओर से घेरने के बाद उसे हिरासत में लिया।
बताया जा रहा है कि फराज स्थानीय स्तर पर एक डॉक्टर के क्लिनिक में काम करता था और उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी।
मोबाइल, सोशल मीडिया और बैंक खातों की जांच
जांच एजेंसियों ने फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल डेटा की पड़ताल की जा रही है।
इसके साथ ही बैंकिंग लेन-देन और संभावित विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड से पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जांच के दायरे में पूरे नेटवर्क की कड़ियां
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क से प्रदेश और अन्य राज्यों में कितने लोग जुड़े थे। जांच का फोकस डिजिटल गतिविधियों, विदेशी संपर्कों, फंडिंग स्रोतों और नेटवर्क विस्तार की संभावित योजनाओं पर है।
फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू को खंगाल रही हैं और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




