सीएम मोहन यादव आज रीवा में, भैरवनाथ मंदिर लोकार्पण कार्यक्रम में होंगे शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 जनवरी को रीवा दौरे पर भैरवनाथ मंदिर का लोकार्पण करेंगे। 10वीं शताब्दी की दुर्लभ शयन मुद्रा वाली प्रतिमा और 17.13 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन।

रीवा. डॉ. मोहन यादव 31 जनवरी को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा आएंगे। इस दौरान वे गूढ़ विधानसभा क्षेत्र में ग्राम खामडीह (आमडीह) स्थित भैरवनाथ मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 1 बजे मंदिर परिसर पहुंचकर भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे और ध्वज चढ़ाएंगे।
10वीं शताब्दी की दुर्लभ शयन मुद्रा वाली प्रतिमा
ग्राम खामडीह में स्थापित भैरव बाबा की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमा शयन मुद्रा में है, जो देश में दुर्लभ मानी जाती है। स्थापत्य कला की दृष्टि से यह प्रतिमा लगभग 10वीं–11वीं शताब्दी के कल्पुरि (कलचुरी) काल की मानी जाती है। वर्षों तक यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थित रही।
एलएडी योजना के तहत 1.80 करोड़ से हुआ मंदिर का निर्माण
राज्य शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं नवीन निर्माण कार्य कराया गया है। भैरव बाबा की विशाल प्रतिमा के चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल लागत 1.80 करोड़ रुपये है। परिसर में सामुदायिक भवन, आठ दुकानें एवं अन्य सहायक संरचनाएं भी विकसित की गई हैं।
17.13 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर 17 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए चार निर्माण कार्यों का लोकार्पण करेंगे। साथ ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को लाभ वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक नागेंद्र सिंह, दिव्यराज सिंह, सिद्धार्थ तिवारी, नरेंद्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
देश की सबसे बड़ी भैरवनाथ प्रतिमाओं में एक
भैरवनाथ बाबा की यह प्रतिमा भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को दर्शाती है और देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। प्रतिमा की लंबाई लगभग 8.5 मीटर तथा चौड़ाई 3.7 मीटर है। यह प्रतिमा एक ही विशाल पत्थर से निर्मित है और कैमूर पर्वतमाला की गोद में स्थित रही है।
मूर्ति शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण
काले रंग के बलुआ पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। भैरवनाथ के मुखमंडल पर रौद्र भाव के साथ-साथ गहन शांति का भाव भी झलकता है। चतुर्भुज स्वरूप वाली इस प्रतिमा में—
- दाहिने ऊपरी हाथ में त्रिशूल
- दाहिने निचले हाथ में रुद्राक्ष माला
- बाएं ऊपरी हाथ में तीन फनों वाला सर्प
- बाएं निचले हाथ में बीज और फल अंकित हैं, जो सृष्टि, संहार, साधना और उर्वरता के प्रतीक माने जाते हैं।




