भोपाल की कचरा खंती बनी राष्ट्रीय चिंता, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को जारी किए सख्त निर्देश
भोपाल की आदमपुर डंप साइट में बार-बार लगने वाली आग पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कलेक्टरों को ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई और जुर्माना लगाने की अनुमति देने का संकेत दिया है।

Adampur Dump Site में लगातार लग रही आग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने साफ संकेत दिए कि खुले में कचरा जलाने, गंदगी फैलाने और वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के उल्लंघन पर अब मौके पर ही कार्रवाई की जा सकेगी। कोर्ट ने कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और ऑन-द-स्पॉट जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टरों को मिल सकते हैं विशेष अधिकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 की धारा 5 के तहत कलेक्टरों को विशेष पावर देने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत मोबाइल कोर्ट चलाने और तत्काल जुर्माना लगाने जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है। अदालत ने सभी राज्यों से 22 मई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें कचरा छंटाई, प्रोसेसिंग, पेनाल्टी सिस्टम और मोबाइल कोर्ट की रूपरेखा शामिल होगी।
आदमपुर आग मामले से शुरू हुई बड़ी बहस
यह पूरा मामला भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग से जुड़ा है। पिछले सप्ताह भी डंप साइट पर आग लगने से आसपास के इलाकों में धुएं और प्रदूषण की गंभीर स्थिति बन गई थी। पर्यावरणविद् Dr. Subhash C. Pandey ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी, जिसके बाद 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। इसी जुर्माने को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
देशभर के मुख्य सचिवों को कोर्ट में बुलाया गया
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सिर्फ भोपाल या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं माना। सुनवाई के दौरान कई राज्यों के मुख्य सचिवों को पेश होने के निर्देश दिए गए। अदालत ने कहा कि देशभर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है, जिससे स्वच्छता अभियान और पर्यावरण सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कर्नाटक, बिहार और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के अधिकारियों ने कोर्ट को नई योजनाओं पर काम करने की जानकारी दी।
हर दिन पैदा हो रहा 1.70 लाख टन कचरा
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पैदा होता है। हालांकि भोपाल और Indore जैसे शहरों में कचरा कलेक्शन व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बड़ी मात्रा में कचरा बिना वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किए पुराने डंपसाइट्स पर जमा हो रहा है, जिससे हवा और भूजल प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
2026 से लागू होंगे नए नियम
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि 1 अप्रैल 2026 से नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू होंगे। इन नियमों में कचरा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए व्यापक प्रावधान शामिल किए गए हैं। अदालत ने साफ किया कि अब और देरी की गुंजाइश नहीं है और स्थानीय निकायों, पार्षदों, महापौरों और प्रशासनिक अधिकारियों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
भोपाल नगर निगम को मिला अतिरिक्त समय
आदमपुर डंप साइट से जुड़े पुराने कचरे के निपटान और टेंडर प्रक्रिया को लेकर भोपाल नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा था। अदालत ने निगम को टेंडर फाइनल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए तेजी से कार्रवाई करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।




