मध्य प्रदेश

छिंदवाड़ा किडनी फेलियर कांड: मौत का आंकड़ा 9, नागपुर में एक और बच्चे ने तोड़ा दम

छिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा जिले में बच्चों में किडनी फेलियर से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि पिछले लगभग 30 दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 9 तक पहंच गया है। जानकारी के अनुसार, बुधवार को भी इलाज के दौरान नागपुर में एक बच्चे की मौत हो गई, जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 9 हो गई है।

बीमारी की शुरुआत
बताया गया है कि किडनी फेलियर से बच्चों की मौत का सिलसिला 4 सितंबर को पहली मौत के साथ शुरू हुआ था और एक महीने के भीतर यह 9 पर पहुंच गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन लगातार सक्रिय है। परासिया एसडीएम सौरभ कुमार यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन द्वारा अब तक 1,400 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, और यह स्क्रीनिंग अभियान जारी है। वर्तमान में रोजाना 120 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि संभावित मामलों की जल्द पहचान कर उनका इलाज किया जा सके। प्रशासन इस बीमारी के मूल कारण का पता लगाने और प्रभावित बच्चों को उचित उपचार देने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रहा है।

इस मामले में परासिया विधायक सोहन वाल्मीकि ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मृतक के स्वजन को 10-10 लख रुपए के मुआवजा दिलाने की मांग की है। बच्चों की मौत के मामले में जो तथ्य सामने आया है। उसके मुताबिक जो सिरप दी गई वो डॉक्टर प्रवीण सोनी ने लिखी थी। जिसमें कोल्ड्रिफ और नेक्सा डीएस शामिल हैं। कोल्ड्रिफ 20 साल पुरानी कंपनी है।

कफ सिरप भी लंबे समय से बाजार में है। इसकी रिटेल कीमत 89 रुपए है। नेक्साडीएससिरप लगभग डेढ़ साल पहले ही बाजार में आया है। इसकी रिटेल कीमत 75 रुपए है। परासिया ब्लॉक के दो प्रमुख शिशु रोग विशेषज्ञ- डॉ. प्रवीण सोनी और डॉ. अमन सिद्दीकी का नाम सामने आया है, जिनके पर्चों पर कोल्ड्रिफ सिरप लिखा पाया गया है। विशेष रूप से डॉ. सोनी के परिवार के सदस्य ही उनके मेडिकल स्टोर का संचालन करते हैं, जहां यह दवा आसानी से उपलब्ध थी।

बेटे को बचाने सब कुछ बेच दिया
जिन लोगों ने बच्चे गंवाए हैं, उनके आंसू नहीं रुक रहे। उसेद के पिता यासीन ने कहा कि बेटे की हंसी घर में अब कभी नहीं गूंजेगी। उसे बचाने के लिए जिंदगी की जमा पूंजी, आटो, सब कुछ बेच दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब मैं बेसहारा हूं, पर अपने छोटे बेटे के लिए मुझे जीना होगा। बस दुआ कीजिए कि किसी और पिता को यह दर्द न सहना पड़े। सीन बताते हैं कि 31 अगस्त को उसेद को बुखार आया था। स्थानीय क्लीनिक में इलाज के बाद 6 सितंबर को वह ठीक हो गया। अगले दिन फिर बुखार आया तो उसे छिंदवाड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे नागपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी किडनी में इंफेक्शन है। पेशाब रुक रही है।

तीन बार कराया डायलिसिस
इलाज के दौरान उसेद का तीन बार डायलिसिस करवाया गया, जिससे किडनी की बीमारी में आराम मिला। लेकिन इस बीच उसके ब्रेन में सूजन आ गई। ब्रेन हेमरेज हो गया। 6 दिन चले इलाज के बाद 13 सितंबर की शाम को उसकी मौत हो गई। परासिया में रहने वाली आफरीन परवीन की आंखों में भी आंसू हैं। इस संयुक्त परिवार में कुछ दिन पहले तक 12 बच्चे थे, लेकिन अब सिर्फ 11 ही बचे हैं। उनका सबसे बड़ा बेटा अदनान, जो सिर्फ 5 साल 8 महीने का था, अब इस दुनिया में नहीं रहा। दोनों किडनियां खराब होने के कारण उसकी जान चली गई।

आफरीन ने बताया कि 21 अगस्त को अदनान को पहली बार बुखार आया था। दवा लेने के बाद वह ठीक हो गया था। 26 अगस्त को उसे बार-बार उल्टी होने लगी, जिसके कारण परासिया के अस्पताल में भर्ती कराया गया। 27 अगस्त को फिर से बुखार आने पर उसे इंजेक्शन दिया गया।

Republic News

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button