होर्मुज जलडमरूमध्य पर छिड़ा विवाद, अमेरिका से डील के खिलाफ ईरान में उग्र प्रदर्शन
ईरान और अमेरिका के संभावित शांति समझौते से पहले ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर गालिबाफ पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं।

तेहरान. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चा तेज होते ही ईरान में विरोध के स्वर भी मुखर हो गए हैं। देश के कई शहरों में नागरिकों का एक वर्ग सड़कों पर उतर आया है और सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते से ईरान की रणनीतिक और आर्थिक ताकत कमजोर हो सकती है।
विदेश मंत्री और संसद स्पीकर बने विरोध का केंद्र
प्रदर्शनकारियों के निशाने पर विशेष रूप से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका के साथ चल रही वार्ता में दोनों नेताओं की भूमिका को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर और मशहद में विदेश मंत्रालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने दोनों नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मशहद में महिलाओं सहित कई प्रदर्शनकारी झंडे लहराते नजर आए। विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि प्रस्तावित समझौते में अमेरिका को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी जा रही हैं, जिससे ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को नुकसान पहुंच सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद का बड़ा कारण
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। उनका मानना है कि समझौते के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरान का प्रभाव कमजोर हो सकता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से ईरान की रणनीतिक ताकत का प्रमुख केंद्र रहा है।
हाल ही में एक साक्षात्कार में विदेश मंत्री अराघची ने संकेत दिया था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए खोलने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। इसी बयान के बाद विरोध और तेज हो गया।
समझौते को लेकर बढ़ी अटकलें
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया जाएगा। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी संकेत दिया है कि दोनों पक्ष जल्द किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं।
हालांकि, ईरानी नेतृत्व ने अभी तक किसी निश्चित तारीख पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन अंतिम समझौते में अभी कुछ समय लग सकता है।
राष्ट्रीय हित बनाम कूटनीतिक समाधान
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका के साथ संभावित समझौता केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति का भी बड़ा विषय बन चुका है। एक ओर सरकार इसे तनाव कम करने और आर्थिक राहत की दिशा में कदम मान रही है, वहीं विरोधी वर्ग इसे राष्ट्रीय हितों से समझौता बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस समझौते और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।




