
नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार अब ई-वेस्ट इको पार्क को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करेगी। इस मॉडल के तहत परियोजना के निर्माण और संचालन का खर्च निजी कंपनी उठाएगी, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इसके लिए दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (DSIIDC) ने टेंडर जारी कर निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
PPP मॉडल पर विकसित होगा ई-वेस्ट इको पार्क
दिल्ली सरकार की एजेंसी DSIIDC ने ई-वेस्ट इको पार्क के विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार चयनित निजी कंपनी को यह परियोजना करीब 30 वर्षों की लीज पर सौंपी जा सकती है। कंपनी पार्क के निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।
दिल्ली में हर साल निकलता है 2 लाख टन ई-वेस्ट
दिल्ली देश के सबसे बड़े ई-वेस्ट उत्पादक राज्यों में शामिल है। राजधानी में हर वर्ष करीब 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है, जो देश के कुल ई-वेस्ट का लगभग 9.5 प्रतिशत माना जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वर्ष 2022 में ई-वेस्ट इको पार्क की अवधारणा सामने आई थी।
जमीन की कमी से अटका था प्रोजेक्ट
पूर्व सरकार ने होलंबी कलां क्षेत्र में करीब 21 एकड़ भूमि पर ई-वेस्ट इको पार्क विकसित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, भूमि उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं और डीडीए से पूरी जमीन नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब मौजूदा सरकार ने उपलब्ध भूमि को ध्यान में रखते हुए परियोजना को 11.4 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध करा दी गई है।
ई-वेस्ट इको पार्क में क्या-क्या सुविधाएं होंगी?
सुरक्षित तरीके से होगा ई-कचरे का निपटान
ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत पुराने मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
मरम्मत कर दोबारा उपयोग में लाए जाएंगे उपकरण
जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपयोग योग्य स्थिति में होंगे, उनकी मरम्मत और नवीनीकरण (Refurbishment) कर उन्हें दोबारा बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।
बनेगा विशेष इलेक्ट्रॉनिक बाजार
इको पार्क में एक समर्पित इलेक्ट्रॉनिक मार्केट भी विकसित किया जाएगा, जहां रीसाइकिल और रिफर्बिश्ड उत्पादों की बिक्री होगी। इससे सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।
कीमती धातुओं की होगी रिकवरी
ई-कचरे से प्लास्टिक, तांबा, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान धातुओं को अलग करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए संसाधनों का दोबारा उपयोग संभव हो सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-वेस्ट इको पार्क के संचालन से न केवल इलेक्ट्रॉनिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव होगा, बल्कि रीसाइक्लिंग उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।




