मध्य प्रदेश

Budget 2026: शिक्षा और पेरेंटिंग सेक्टर पर क्या बोले Get Set Parent की फाउंडर डॉ. पल्लवी राव सी. चतुर्वेदी

स्कूलों में एवीजीसी लैब और SHE मार्ट्स की पहल से रचनात्मक शिक्षा, डिजिटल कौशल और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा, बच्चों के लिए खुलेंगे नए अवसर।

स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर और एवीजीसी (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब कार्यक्रम लागू करने का प्रस्ताव एक प्रगतिशील और समयानुकूल कदम है। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि डिजिटल कंटेंट आज बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति और सीखने की प्रक्रिया को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है।

रचनात्मकता के साथ जरूरी जीवन कौशल का विकास

एनीमेशन, गेमिंग और विज़ुअल स्टोरीटेलिंग से बच्चों को संरचित परिचय मिलने से न केवल उनकी कल्पनाशीलता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि एकाग्रता, टीमवर्क, समस्या-समाधान और स्क्रीन के सजग उपयोग जैसे आवश्यक जीवन कौशल भी विकसित होंगे। ये क्षमताएँ बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने में सहायक होंगी और उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करेंगी।

उभरते रचनात्मक करियर के लिए नए अवसर

एवीजीसी लैब्स के माध्यम से छात्रों को कम उम्र में ही रचनात्मक उद्योगों की समझ मिलेगी। इससे एनीमेशन, गेम डिजाइन, डिजिटल आर्ट और कंटेंट क्रिएशन जैसे उभरते क्षेत्रों में करियर की संभावनाएँ खुलेंगी और पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल का विकास होगा।

SHE मार्ट्स: सामाजिक और आर्थिक रोल मॉडल का निर्माण

उतनी ही महत्वपूर्ण पहल सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) मार्ट्स की शुरुआत है। महिलाओं उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट्स बच्चों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़ते हैं, जहाँ वे महिलाओं को नेतृत्व करते, उद्यम संचालित करते और सकारात्मक बदलाव लाते हुए देख सकते हैं।

शिक्षा, उद्यमिता और आत्मविश्वास का मजबूत रिश्ता

SHE मार्ट्स बच्चों को सार्थक सामाजिक और आर्थिक रोल मॉडल प्रदान करते हैं। इससे शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक आत्मविश्वास के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित होता है। यह अनुभव बच्चों में आत्मनिर्भरता, समानता और आकांक्षा की भावना को प्रोत्साहित करता है।

समग्र सीखने का नया वातावरण

कुल मिलाकर, एवीजीसी लैब और SHE मार्ट्स जैसी पहलें मिलकर ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करती हैं, जो केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक चेतना को भी समान महत्व देता है।

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