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संसद में बदल रहा राजनीतिक गणित! TMC के संभावित टूट से NDA को मिल सकती है बड़ी बढ़त

तृणमूल कांग्रेस में संभावित बगावत और सांसदों के इस्तीफों से संसद का गणित बदलता नजर आ रहा है। इससे एनडीए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है।

नई दिल्ली. देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संभावित बगावत और सांसदों के इस्तीफों की अटकलों के बीच संसद में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) का संख्या बल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने में मददगार साबित हो सकता है।

राज्यसभा में मजबूत हो सकता है NDA

सूत्रों के मुताबिक, झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों के बाद एनडीए की मौजूदा संख्या में तीन सीटों का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए के पास लगभग 148 सांसद हैं।

यदि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों के इस्तीफों के बाद होने वाले उपचुनावों में एनडीए समर्थित उम्मीदवार जीतते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 154 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, टीएमसी के और सांसदों के इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है, जिससे एनडीए का आंकड़ा 163 तक पहुंचने की चर्चा है।

संवैधानिक संशोधनों के लिए अहम है संख्या

राज्यसभा में किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में एनडीए के लिए संख्या बल बढ़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि यह पूरा परिदृश्य संभावित इस्तीफों, उपचुनावों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

नवंबर में बदल सकता है समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवंबर के बाद स्थिति फिर बदल सकती है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। राज्य विधानसभा में बेहतर स्थिति के कारण Samajwadi Party कुछ नई सीटें हासिल कर सकती है, जिससे एनडीए की संख्या प्रभावित हो सकती है।

विपक्षी खेमे की स्थिति

वर्तमान में विपक्षी गठबंधन के पास राज्यसभा में 64 सांसद बताए जा रहे हैं। इस बीच कुछ दलों के गठबंधन से अलग होने या स्वतंत्र रुख अपनाने की चर्चाओं ने विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल खड़े किए हैं। साथ ही, क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, जो विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपना सकते हैं।

लोकसभा में अभी भी दूर है दो-तिहाई बहुमत

लोकसभा में भी टीएमसी के कुछ सांसदों के अलग समूह बनाने और एनडीए को समर्थन देने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, संभावित समर्थन मिलने के बाद भी एनडीए की संख्या दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 363 सीटों से काफी कम रहने की संभावना है। यही कारण है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में संख्या बल का यह गणित आने वाले महीनों में भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

नजरें आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर

फिलहाल टीएमसी में संभावित टूट, सांसदों के इस्तीफों और राज्यसभा चुनावों से जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि ये राजनीतिक बदलाव होते हैं, तो संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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