मध्य प्रदेश

भोपाल स्लॉटर हाउस खुलासा: कम उम्र के पशुओं का वध, 26 टन गोमांस की पुष्टि और सिस्टम पर गंभीर सवाल

भोपाल के स्लॉटर हाउस में नियमों की अनदेखी कर अवैध कटाई, 26 टन गोमांस की पुष्टि, फर्जी रिकॉर्ड, एक्सपोर्ट रूट और नगर निगम की भूमिका पर बड़ा खुलासा।

भोपाल. भोपाल के स्लॉटर हाउस में नियमों को ताक पर रखकर अवैध कटाई का मामला लगातार गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यहां 14–15 साल की निर्धारित उम्र के बजाय 4 से 8 साल की दुधारू और स्वस्थ भैंसों को काटा जा रहा था। जांच के दौरान छोटे-छोटे बछड़ों और पाड़ों के अवशेष मिलने से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

26 टन गोमांस से भरा ट्रक, निगम के सर्टिफिकेट पर सवाल

पीएचक्यू (PHQ) के सामने 26 टन गोमांस से भरा ट्रक पकड़ा गया था। यह मांस स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजा जा रहा था, जिसके लिए नगर निगम ने सर्टिफिकेट जारी किया था। निगम के डॉक्टर ने मांस को भैंस का बताकर मानव उपभोग के लिए फिट माना, लेकिन बाद में पुलिस की पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि हो चुकी है।

रिकॉर्ड में 40, हकीकत में 150 पशुओं का वध

  • पड़ताल में सामने आया कि स्लॉटर हाउस में रोजाना 100 से 150 पशुओं का वध किया जा रहा था, जबकि नगर निगम के रिकॉर्ड में औसतन केवल 40 भैंसों की स्लॉटिंग दर्ज थी।
  • 22 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी ने खुद स्वीकार किया था कि रोज 100 से 150 पशुओं की कटाई हो रही है। यानी रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन में तीन गुना से ज्यादा का अंतर था।
  • यही मांस मुंबई और चेन्नई के रास्ते दुबई समेत खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट किया जा रहा था, जिसकी जानकारी नगर निगम प्रशासन को नहीं थी।

पुलिस रिपोर्ट की आड़ में कार्रवाई टालने के आरोप

जिस 26 टन मांस में गोमांस की पुष्टि हो चुकी है, उस पर भी पूरा सिस्टम पुलिस जांच रिपोर्ट का इंतजार करता दिख रहा है।
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में केवल भैंसें नजर आ रही हैं, जबकि नगर निगम का तर्क है कि पुलिस रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जांच होगी।

चार्जशीट दाखिल होने में कम से कम तीन महीने लगते हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि जब पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि हो चुकी है, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सियासी दबाव, अफसरों की चुप्पी और करोड़ों की जमीन

गोमांस मामले में मेयर मालती राय ने एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों से निगम के पक्ष में खड़े होने की अपील की। इस पर पार्षदों ने सवाल उठाया कि “मान लिया सब नियम से हुआ, लेकिन गोमांस की पुष्टि को कैसे जस्टीफाई किया जाएगा?”

नियमों के पालन में डॉक्टर और तकनीक दोनों फेल नजर आए—

  • बिना फिटनेस रिपोर्ट पशुओं का वध
  • बिना स्टनिंग क्रूर कटाई
  • जमीन पर मांस की अवैध ड्रेसिंग

साथ ही यह भी सामने आया कि करीब साढ़े तीन एकड़ की लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन स्लॉटर हाउस को सालाना सिर्फ 4 लाख रुपये किराये पर दी गई। संचालन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग का पूरा नियंत्रण संचालक के पास था।

कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

“गोमांस की पुष्टि होते ही स्लॉटर हाउस सील कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट के बाद की जाएगी।”
— मालती राय, मेयर, नगर निगम भोपाल

“गोमांस मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
— विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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