भोजशाला में गुपचुप रखी गई मां वाग्देवी की प्रतिमा, ASI ने हटाई; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
धार भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद ASI ने तत्काल कार्रवाई की। जानिए पूरा घटनाक्रम और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।
धार. धार स्थित भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा को गुपचुप तरीके से गर्भगृह में स्थापित किए जाने की घटना ने प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही एएसआई ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रतिमा को परिसर से हटा दिया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रतिमा को परिसर के भीतर कौन लेकर आया और उसे गर्भगृह में किसने स्थापित किया।
गर्भगृह में रखी गई अष्टधातु की प्रतिमा
जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर कुछ अज्ञात लोग भोजशाला परिसर में पहुंचे और गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा स्थापित कर दी। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचने लगे। हालांकि बाद में प्रशासन ने प्रतिमा को हटाकर पूर्ववत प्रतीकात्मक स्वरूप को ही स्थापित रखा।
घटनाक्रम को लेकर जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। एएसआई अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने मामले पर अधिकृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
सूचना मिलते ही हरकत में आया ASI
शाम करीब साढ़े छह बजे जैसे ही प्रतिमा स्थापना की सूचना एएसआई अधिकारियों तक पहुंची, विभाग में हड़कंप मच गया। टीम तत्काल मौके पर पहुंची और प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई की गई।
हालांकि अब तक यह रहस्य बना हुआ है कि इतनी संवेदनशील जगह पर प्रतिमा कैसे पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।
लंदन से मूल प्रतिमा वापस लाने की मांग
मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित बताई जाती है, जिसे ब्रिटिश शासनकाल में भारत से ले जाया गया था। हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय समाज द्वारा मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग तेज हुई है।
बताया जाता है कि मां वाग्देवी की एक प्रतिकृति ग्वालियर के प्रभात स्टूडियो में भी रखी हुई है, जिसका निर्माण वर्ष 2011 में कराया गया था, लेकिन वह अब तक धार नहीं पहुंच सकी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। यहां कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू है। परिसर में पुलिस बल, विशेष सुरक्षा कर्मी, एएसआई के गार्ड, सीसीटीवी कैमरे और मेटल डिटेक्टर जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
इसके बावजूद अष्टधातु जैसी भारी प्रतिमा का परिसर में पहुंचना और गर्भगृह तक स्थापित हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं।
मुस्लिम समाज ने जताया विरोध
कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी के नायब सदर इरशाद मंसूरी ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए इसे कानून का उल्लंघन और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बताया।
कमेटी ने मांग की है कि प्रतिमा स्थापित करने वाले अज्ञात लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और मजबूत की जाए।
पुलिस अधीक्षक का बयान
धार पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि प्रतिमा रखने या नहीं रखने को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पक्ष शिकायत कर रहा है तो उसकी वैधता की भी जांच की जाएगी।
निरीक्षण के कुछ घंटे बाद हुआ घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार शनिवार दोपहर एएसआई के अधीक्षक डॉ. शिवाकांत बाजपेई ने भोजशाला का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया था।
दिलचस्प बात यह है कि उनके निरीक्षण के कुछ ही घंटों बाद प्रतिमा स्थापना की घटना सामने आई, जिससे सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में जुटी एजेंसियां
फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिमा परिसर के अंदर कैसे पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।




