डिजिटल लॉकर में डिग्री, ‘क्रेडिट बैंक’ में पढ़ाई का रिकॉर्ड; NEP ने बदल दी उच्च शिक्षा की तस्वीर
ABC ID और डिजीलॉकर योजना से छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख से अधिक छात्रों को बड़ा लाभ मिल रहा है। पढ़ाई के क्रेडिट सुरक्षित रहेंगे और डिग्री-मार्कशीट मोबाइल पर उपलब्ध होगी।

रायपुर. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के स्वरूप को नई दिशा दी है। सत्र 2023-24 से शुरू हुई यह व्यवस्था अब पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है, जिससे लाखों विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों को सुरक्षित रखने और देशभर में पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिल रही है।
राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हैं। इसके माध्यम से पढ़ाई, डिग्री और शैक्षणिक रिकॉर्ड अब मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित उपलब्ध हैं।
क्या है एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC)?
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को ऐसे डिजिटल बैंक के रूप में समझा जा सकता है, जहां धन नहीं बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई के दौरान अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट जमा होते हैं। यदि किसी कारणवश छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसके द्वारा अर्जित क्रेडिट सुरक्षित रहते हैं।
बाद में छात्र दोबारा किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई वहीं से जारी कर सकता है, जहां उसने छोड़ी थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इसे “मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट” व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
पढ़ाई बीच में छूटने पर भी नहीं होगा नुकसान
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्हें आर्थिक, पारिवारिक या अन्य कारणों से बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। पहले ऐसे छात्रों की वर्षों की मेहनत व्यर्थ हो जाती थी, लेकिन अब उनके अर्जित क्रेडिट डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे। विद्यार्थी भविष्य में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर अपने शैक्षणिक सफर को आगे बढ़ा सकेंगे।
छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में लागू व्यवस्था
राज्य के सभी 33 जिलों में यह डिजिटल शिक्षा प्रणाली सक्रिय हो चुकी है। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय समेत सभी शासकीय और निजी महाविद्यालय इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक अवसरों तक आसान पहुंच मिल रही है।
डिजीलॉकर बना छात्रों का डिजिटल सुरक्षा कवच
अब विद्यार्थियों को मार्कशीट, डिग्री और प्रमाण पत्र खोने की चिंता नहीं रहेगी। विश्वविद्यालयों को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से शैक्षणिक दस्तावेज सीधे डिजीलॉकर में उपलब्ध हो रहे हैं।
डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से मूल प्रमाणपत्रों के समान मान्य हैं। ऐसे में नौकरी, प्रवेश या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए छात्रों को फाइलों का बोझ उठाने की जरूरत नहीं होगी।
केंद्र सरकार दे रही शत-प्रतिशत सहयोग
इस डिजिटल शिक्षा ढांचे के लिए केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़े अवसर
ABC ID और क्रेडिट ट्रांसफर सुविधा के जरिए छत्तीसगढ़ के छात्र अब देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़ सकते हैं। इससे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल दस्तावेजों के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को अधिक लचीली, आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




