दंतेवाड़ा में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, प्राकृतिक खेती और मिलेट्स से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती, मिलेट्स उत्पादन, बीज बैंक और जल संरक्षण के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता सुधारने का लक्ष्य रखा गया है।
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बचाने और लोगों को पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती और मिलेट्स (मोटे अनाज) को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य कृषि भूमि की सेहत सुधारना, खेती की लागत कम करना और प्राकृतिक कृषि को जन-आंदोलन का रूप देना है।
दंतेवाड़ा में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई इस रणनीतिक योजना के तहत जिले में प्राकृतिक खेती, जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। अभियान को दंतेवाड़ा के चारों विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करना और किसानों को टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।
मिलेट्स को मिलेगा विशेष बढ़ावा
अभियान के तहत ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी पारंपरिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इन फसलों को ‘सुपरफूड’ और ‘अन्न’ के रूप में पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मिलेट्स कम पानी में उगते हैं, सूखा सहन करने की क्षमता रखते हैं और पोषण से भरपूर होते हैं।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य
- मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार
- प्राकृतिक और जैविक खेती का विस्तार
- पारंपरिक बीजों का संरक्षण
- जल एवं नमी संरक्षण को बढ़ावा
- किसानों की लागत कम करना
- पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत बनाना
पांच चरणों में लागू होगी योजना
- मृदा स्वास्थ्य मैपिंग: जिले में सॉयल हेल्थ कार्ड और मिट्टी की गुणवत्ता का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
- मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा: रागी, कोदो, कुटकी और अन्य स्थानीय पौष्टिक फसलों के रकबे में वृद्धि की जाएगी।
- जैविक खाद का प्रशिक्षण: किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और ब्लू-ग्रीन एल्गी के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- बीज बैंक की स्थापना: पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए सामुदायिक बीज बैंक और बीज मंडियां स्थापित की जाएंगी।
- हरित खाद वाले पौधों का रोपण: खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे पौधों का रोपण किया जाएगा। अभियान के तहत एक लाख पौधे लगाने और वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
135 ग्राम पंचायतों में लागू होगी योजना
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले की 135 ग्राम पंचायतों में इस अभियान को लागू किया जाएगा। इसके तहत:
- 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती
- 4,300 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स उत्पादन
- 40 सामुदायिक बीज बैंक की स्थापना
का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
किसानों को होंगे बड़े फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार इस अभियान से अगले तीन वर्षों में मिट्टी के जैविक कार्बन स्तर में सुधार होगा। साथ ही रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके अलावा दंतेवाड़ा के मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।
स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं मिलेट्स
मिलेट्स पोषण का बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
मिलेट्स के प्रमुख फायदे
- हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
- हड्डियों को मजबूत बनाते हैं
- एनीमिया की रोकथाम में सहायक
- मधुमेह नियंत्रण में मददगार
- स्वस्थ वजन बनाए रखने में उपयोगी
- पाचन तंत्र और आंतों के स्वास्थ्य में सुधार
टिकाऊ कृषि मॉडल बनने की दिशा में कदम
दंतेवाड़ा में रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन फसलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




