राजनीतिक

नगर निगम की सियासत गरमाई: क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस को फायदा

भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले बीजेपी के 9 पार्षद अलग होकर कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन के साथ आए। 90 सीटों वाले निगम में कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंची।

मुंबई. महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। बीजेपी के 22 पार्षदों में से 9 पार्षद अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दे चुके हैं। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के लिए मेयर पद का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है।

बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा कांग्रेस गठबंधन

कांग्रेस के एक पदाधिकारी के अनुसार अलग हुए पार्षदों ने भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (BSF) बनाकर कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन को समर्थन दिया है। इससे 90 सदस्यीय निकाय में गठबंधन का आंकड़ा 46 सीटों के बहुमत को पार कर गया है।

उन्होंने दावा किया कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच मतभेद उभर आए हैं, जिससे सियासी समीकरण कांग्रेस के पक्ष में चले गए हैं।

कांग्रेस का मेयर बनना लगभग तय?

पिछले महीने हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। अब नए समर्थन के बाद कांग्रेस अपना मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की स्थिति में दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने पहले शिवसेना को समर्थन दिया था, लेकिन नए राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरा समीकरण बदल दिया है।

भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका: किसके पास कितनी सीटें?

90 सीटों वाली महानगरपालिका में चुनाव परिणाम इस प्रकार रहे —

  • कांग्रेस – 30 सीट
  • बीजेपी – 22 सीट
  • शिवसेना (शिंदे गुट) – 12 सीट
  • एनसीपी (शरद पवार गुट/एसपी) – 12 सीट
  • समाजवादी पार्टी – 6 सीट
  • कोनार्क विकास अघाड़ी – 4 सीट
  • भिवंडी विकास अघाड़ी – 3 सीट
  • निर्दलीय – 1 सीट
  • किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।

जनवरी में हुए थे चुनाव

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए गए थे। भिवंडी-निजामपुर में त्रिशंकु जनादेश मिला था, लेकिन अब नए राजनीतिक समर्थन से सत्ता का समीकरण बदल गया है।

बदलते सियासी समीकरणों पर सबकी नजर

मेयर चुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अब देखना होगा कि अंतिम मतदान में कौन-सा गठबंधन बाजी मारता है, हालांकि मौजूदा स्थिति में कांग्रेस गठबंधन मजबूत नजर आ रहा है।

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