बड़ा अपडेट! शराब घोटाला केस में कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली। जमानत अवधि में राज्य में रहने पर रोक, ईडी-ईओडब्ल्यू मामले में राहत।

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। यह जमानत प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में दी गई है। हालांकि, जमानत के लिए बेल बॉन्ड की शर्तें निचली अदालत तय करेगी। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान कवासी लखमा छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे।
15 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी
मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत का आदेश जारी किया। प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वे रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक रिमांड पर थे।
ईडी के गंभीर आरोप
ईडी का आरोप है कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य थे और उनके निर्देशों पर पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार—
- शराब नीति में बदलाव और लाइसेंस प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही
- आबकारी विभाग में अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इन्हें रोकने के प्रयास नहीं किए
- 72 करोड़ रुपये की अवैध आय का दावा
- ईडी ने अदालत में दावा किया कि कथित घोटाले के दौरान कवासी लखमा को हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये मिलते थे।
- 36 महीनों में कुल 72 करोड़ रुपये की अवैध आय
- इस राशि का उपयोग बेटे के मकान और सुकमा में कांग्रेस भवन के निर्माण में किया गया
- एजेंसी का यह भी कहना है कि इस सिंडिकेट के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हुए 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई।
ईडी के साथ एसीबी भी कर रही जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच फिलहाल ईडी के साथ-साथ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) भी कर रही है। मामले में तत्कालीन सरकार के कई अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
रिहाई का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कवासी लखमा की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। अब आगे की प्रक्रिया निचली अदालत में बेल बॉन्ड और शर्तों के निर्धारण के बाद पूरी की जाएगी।



