नीति और विकास पर मंथन: मध्य क्षेत्रीय परिषद में राज्यों–केंद्र का संवाद
नवा रायपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ केंद्र सरकार के बीच 50 बिंदुओं पर चर्चा और बेस्ट प्रैक्टिसेस साझा की गईं।

रायपुर. नवा रायपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में परिषद के सदस्य राज्य— छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड— तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित विषयों के निराकरण और बेहतर अंतर्राज्यीय समन्वय को लेकर 50 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के दौरान प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों के समाधान के साथ राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही अधिकारी चारों राज्यों के नवाचारों और बेस्ट प्रैक्टिसेस से भी रू-ब-रू हुए।
मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका
स्थायी समिति की यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसमें मध्य क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है। यहां लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाती हैं। बैठक में सदस्य राज्यों के लंबित अंतर्राज्यीय मामलों, नीतिगत समन्वय और विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने की।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शामी, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा उत्तराखंड के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं चारों राज्यों के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
रचनात्मक चर्चा से निकले ठोस निष्कर्ष
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि चारों राज्यों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच रचनात्मक और उपयोगी चर्चा हुई है। निरंतर संवाद और अंतर्राज्यीय सहयोग से मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव ने चर्चा के निष्कर्षों के अनुरूप तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करने पर बल देते हुए कहा कि इससे राज्यों और केंद्र के बीच आपसी संवाद बेहतर होगा तथा साझा समस्याओं के समाधान हेतु ठोस और व्यावहारिक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
इन मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े विषयों पर चर्चा
बैठक में केंद्रीय पंचायती राज, कानून एवं न्याय, गृह, सहकारिता, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ऊर्जा, आवास और शहरी विकास, ग्रामीण विकास, रेल, खान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कोयला, नागरिक उड्डयन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल जीवन मिशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, वित्त सेवा, डाक, पशुपालन एवं डेयरी, वाणिज्य तथा मछली पालन विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तृत मंथन किया गया।
चारों राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस की प्रस्तुति
बैठक में अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिसेस प्रस्तुत की गईं—
- छत्तीसगढ़: वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 (जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लॉन्च), 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं का एकीकरण; दंतेवाड़ा मॉडल के तहत ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षित भूमि अभिलेख; शिक्षा में एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)।
- मध्यप्रदेश: ग्रामीण पर्यटन विकास (125 गांवों में होम-स्टे), ऊर्जा बचत एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति–2025 (2030 तक 50% बिजली नवीकरणीय स्रोतों से), पीएम टूरिज्म हेली सर्विस।
- उत्तराखंड: किसान–आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला योजना, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (प्लास्टिक कचरा प्रबंधन), स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARA)।
- उत्तर प्रदेश: शहरी आवासीय सुधार, श्रम न्याय सेतु पोर्टल और सेवा मित्र जैसे नवाचार।




