कर संग्रह का विरोधाभास: आबकारी और वैट ने संभाला खजाना, जीएसटी से कमी
मध्य प्रदेश में जीएसटी संग्रह में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वैट, आबकारी और पंजीयन शुल्क से राज्य करों की आय लक्ष्य से अधिक बनी हुई है।

भोपाल. मध्य प्रदेश के बजट का प्रमुख आधार केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा और राज्य के स्वयं के करों से होने वाली आय है। केंद्रीय करों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अहम माध्यम है। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में राज्य को 26,000 करोड़ रुपये का जीएसटी प्राप्त हुआ था, जबकि चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक यह आंकड़ा 25,250 करोड़ रुपये रहा है। इस प्रकार जीएसटी संग्रह में लगभग तीन प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
राज्य करों से राजकोष को मजबूती
राज्य के स्वयं के करों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), आबकारी, पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के माध्यम से सरकार को अब तक 32,660 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक है। इससे राज्य के राजकोष को मजबूती मिली है।
2026 तक राजस्व प्राप्ति का अनुमान
बजट अनुमानों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में 1.11 लाख करोड़ रुपये और राज्य करों से 1.09 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। तीसरी तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें तो जीएसटी को छोड़कर अन्य करों से राजस्व संग्रहण संतोषजनक स्थिति में है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जीएसटी में ही तीन प्रतिशत की कमी देखी जा रही है।
एक फरवरी को पेश होगा बजट
एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि जीएसटी दरों में संशोधन का राजस्व संग्रहण पर कितना प्रभाव पड़ा है। केंद्र सरकार 2026-27 के बजट के साथ 2025-26 का पुनरीक्षित अनुमान भी पेश करेगी, जिससे यह साफ होगा कि वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रदेश को केंद्रीय करों से कितनी राशि प्राप्त होगी।
अगले वर्ष पांच हजार करोड़ तक जीएसटी नुकसान की आशंका
प्रदेश सरकार का अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष में जीएसटी के मद में करीब 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि राज्य करों का संग्रहण लक्ष्य से अधिक चल रहा है। पेट्रोल-डीजल से प्राप्त वैट के रूप में दिसंबर तक 14,000 करोड़ रुपये की आय हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 13,500 करोड़ रुपये था।
आबकारी और पंजीयन शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
आबकारी से प्राप्त आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और अब तक 10,500 करोड़ रुपये राज्य के खजाने में आए हैं।
इसी प्रकार पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क से 8,660 करोड़ रुपये की आय हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 7,750 करोड़ रुपये थी।
करों में वृद्धि की संभावना कम
जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास नए कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं। बिजली सहित जिन-जिन माध्यमों से टैक्स लगाया जा सकता था, वे पहले से लागू हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सरकार कर दरों में वृद्धि करने के बजाय कर संग्रहण की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देगी।




