
नई दिल्ली. दिल्ली की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साल 2020 में करोड़ों रुपये की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत महज 4–5 साल में ही इतनी जर्जर हो गई कि उसे ‘डेंजरस’ घोषित कर बंद करना पड़ा। इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
दरारें, सीलन और कमजोर ढांचा, तस्वीरें-वीडियो जारी कर उठाए सवाल
स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया पर स्कूल भवन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इमारत में जगह-जगह दरारें, भारी सीलन, कमजोर दीवारें और कुछ हिस्सों में लेंटर तक मौजूद नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को बंद करना अनिवार्य हो गया।
भ्रष्टाचार का आरोप, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
स्वाति मालीवाल ने इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार का मामला बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ होता, तो इतनी नई इमारत को ‘खतरनाक’ घोषित करने की नौबत क्यों आती। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता की निगरानी पर भी उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए।
AAP का पलटवार, आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
वहीं आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया समर्थकों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हजारों सरकारी स्कूलों का निर्माण और नवीनीकरण किया गया है और किसी एक इमारत के आधार पर पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाना अनुचित है। साथ ही, पार्टी ने मांग की है कि यदि निर्माण में कोई खामी है तो उसकी तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदार ठेकेदार या एजेंसी पर कार्रवाई की जाए।
घटिया निर्माण या निगरानी में चूक? बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती गई? और सबसे अहम, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन 2020 में बनी स्कूल इमारत का इतनी जल्दी जर्जर होना दिल्ली के सरकारी निर्माण कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।




