छत्तीसगढ़

बलरामपुर में वन भूमि घोटाले का आरोप: 3 एकड़ पर अवैध कब्जा, गरीब ठेला वालों पर कार्रवाई, भूमाफिया बेखौफ

बलरामपुर के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र में तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप। ग्रामीणों ने वन विभाग पर मिलीभगत और गरीब ठेला वालों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पण्डरी गांव में बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इसे सीधा वन भूमि घोटाला बताते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आरोप है कि देवचंद साहू और लालचंद साहू ने कथित रूप से पैसे देकर तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया, जबकि वन विभाग ने बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय गरीब ग्रामीणों को निशाना बनाया।

43 ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को नोटिस, असली कब्जाधारी बेपरवाह

  • वन विभाग की ओर से पण्डरी गांव के 43 ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग वर्षों से छोटे-मोटे ठेले लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और इनका बड़े स्तर के वन भूमि कब्जे से कोई संबंध नहीं है।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि असली अतिक्रमणकारी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

48 घंटे तक चली JCB, तीन एकड़ से अधिक भूमि समतल

ग्रामीणों के अनुसार लालचंद साहू और देवचंद साहू द्वारा वन विभाग की कथित मिलीभगत से लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक जेसीबी मशीन चलाई गई।

इस दौरान वन भूमि को पूरी तरह समतल कर तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक भारी मशीनों के चलने के बावजूद न तो कोई वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही तत्काल कार्रवाई की गई।

रेंजर की भूमिका पर सवाल, अब तक न FIR न कार्रवाई

  • इस पूरे मामले में रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
  • ग्रामीणों का कहना है कि बिना रेंजर की जानकारी के न तो कई दिनों तक जेसीबी मशीन चल सकती है और न ही तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर कब्जा संभव है।
  • इसके बावजूद अब तक किसी भी बड़े भूमाफिया के खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज की गई है और न ही अवैध कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई हुई है।

ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

मामले को लेकर पण्डरी गांव सहित आसपास के इलाकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

साथ ही अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए और दोषी अधिकारियों एवं भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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