राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस, 5 साल के चंदे और खर्च का पूरा हिसाब मांगा गया
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लीगल नोटिस जारी कर 2021-22 से 2025-26 तक मिले चंदे, खर्च, ऑडिट रिपोर्ट और जमीन खरीद का पूरा ब्यौरा 3 दिन में देने को कहा गया है।

अयोध्या. अयोध्या स्थित राम मंदिर को लेकर एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को एक लीगल नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक प्राप्त दान राशि, खर्च और ऑडिट संबंधी दस्तावेजों का विस्तृत ब्योरा तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ट्रस्ट से 5 साल का वित्तीय रिकॉर्ड मांगा
बिहार के बक्सर से RJD सांसद सुधाकर सिंह की ओर से भेजे गए नोटिस में ट्रस्ट को पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान मिले दान और खर्च का साल-दर-साल विवरण देने को कहा गया है। इसके तहत ऑडिटेड बैलेंस शीट, आय-व्यय का लेखा-जोखा, ऑडिटर रिपोर्ट, ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों की जानकारी, बैंक खातों का विवरण और FCRA के तहत प्राप्त विदेशी चंदे की जानकारी भी मांगी गई है।
जनहित और पारदर्शिता का हवाला
मामले में अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि यह नोटिस पूरी तरह जनहित में जारी किया गया है। उनका कहना है कि देश और विदेश के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि वह धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक दान से संचालित किसी भी संस्था के लिए वित्तीय जानकारी साझा करना कोई उपकार नहीं बल्कि कानूनी और नैतिक दायित्व है।
सांसद सुधाकर सिंह ने क्या कहा?
सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उनकी चिंता केवल यह सुनिश्चित करने की है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए फंड का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो। उन्होंने कहा कि जमीन खरीद, खर्च और ऑडिट रिपोर्ट को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जनता के पैसे का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट को स्पष्ट और सत्यापित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
नोटिस में किन कानूनों का उल्लेख?
लीगल नोटिस में इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट 1882, इनकम टैक्स एक्ट 1961, उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट तथा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 का हवाला दिया गया है। नोटिस के अनुसार ये कानून सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्टों को वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और आवश्यक होने पर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी देते हैं।
मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र
नोटिस में मद्रास हाईकोर्ट के नवंबर 2025 के एक फैसले का उल्लेख किया गया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि सार्वजनिक धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाला दान ट्रस्टियों की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि वह समुदाय की धरोहर होता है। इसलिए समुदाय को उस धन के उपयोग और ऑडिट संबंधी जानकारी मांगने का अधिकार है।
जवाब नहीं मिला तो बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो मामले को उचित कानूनी मंचों पर आगे बढ़ाया जाएगा। नोटिस जारी करने वालों का कहना है कि यह मांग केवल सार्वजनिक चैरिटेबल फंड और उसके ऑडिटेड रिकॉर्ड से जुड़ी है, जिन्हें कानून के तहत ट्रस्ट द्वारा सुरक्षित रखना और प्रस्तुत करना अनिवार्य है।




