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हिमाचल के लोग भी फैंसी नंबर के दिवानें हैं, परिवहन विभाग को 23.57 करोड़ की हुई कमाई

शिमला
हिमाचल के लोग भी फैंसी नंबर के दिवानें हैं। लोग अपनी गाड़ियों के लिए रूटीन का नंबर लेने के बजाए फैंसी नंबर ले रहे हैं। भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जेब क्यों न ढीली करनी पड़े। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में 6 हजार लोगों ने अपनी गाड़ियों के लिए फैंसी नंबर लिए हैं। इससे परिवहन विभाग को 23.57 करोड़ की कमाई हुई है।

0001 सीरिज के नंबरों से ही विभाग ने 3.26 करोड़ रुपये कमाए
0001 सीरिज के नंबरों से ही विभाग ने 3.26 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फैंसी नंबरों की ई नीलामी होती है। जिसकी सबसे ज्यादा बोली होती है उसे यह नंबर मिल जाता है। परिवहन विभाग के मुताबिक पिछले साल छह हजार लोगों ने फैंसी नंबर लिए हैं। फैंसी नंबर के लिए बढ़ते क्रेज को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब इस वित्त वर्ष के लिए इसका भी टारगेट तय कर दिया है। विभाग ने तय किया है कि इस साल 31.58 करोड़ रुपए फैंसी नंबरों को बेचकर कमाया जाएगा।

शिमला के व्यक्ति ने लिया था 12.50 लाख का नंबर
शिमला के ठियोग आरएलए (रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथारिटी) का नंबर 12.50 लाख में, जबकि श्री नयनादेवी के स्वारघाट आरएलए का नंबर 9 लाख में बिका है। परिवहन विभाग ने गाड़ियों के लिए फैंसी नंबर लेने के लिए पिछले साल नियमों में बदलाव किया था। 0001 लेने के लिए 5 लाख से बोली शुरू करने का नियम बनाया गया था। ई ऑक्शन में सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को यह नंबर मिलेगा। स्कूटी के लिए विशेष नंबर लेने के लिए एक करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये की बोली लगाने के विवाद के बाद अब सरकार विशेष नंबरों में पारदर्शिता और अधिक राजस्व प्राप्त करने के लिए नियमों में बदलाव किया था।

अतिरिक्त आयुक्त परिवहन व सचिव एसटीए नरेश ठाकुर ने बताया कि परिवहन विभाग ने फैंसी नंबर बेचकर 23.57 करोड़ की कमाई की है। अगले साल के लिए विभाग ने इसका टारगेट भी तय कर दिया गया है। इसके लिए नियम तय है। जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा उसे ही यह नंबर मिलेगा।

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इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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