Amazon के विज्ञापन पर बवाल: आर्यभट्ट के कथित मजाक से नाराज हिंदू संगठन, 48 घंटे में माफी मांगने की मांग
Amazon के एक विज्ञापन में आर्यभट्ट के कथित मजाक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू जनजागृति समिति ने कंपनी को लीगल नोटिस भेजकर 48 घंटे में विज्ञापन हटाने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।

नई दिल्ली. ई-कॉमर्स कंपनी Amazon India के एक विज्ञापन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठन का आरोप है कि कंपनी ने अपने प्रचार अभियान में प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री Aryabhata को आपत्तिजनक और व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है। इस मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है और 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग की गई है।
हिंदू संगठन ने भेजा कानूनी नोटिस
हिंदू संगठन Hindu Janajagruti Samiti की ओर से अधिवक्ता Amita Sachdeva ने Amazon को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि कंपनी 48 घंटे के भीतर विज्ञापन हटाए और भारतीय जनता से बिना शर्त माफी मांगे, अन्यथा उसके खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
‘जीरो डिलीवरी चार्ज’ वाले विज्ञापन पर आपत्ति
विवाद Amazon के प्रचार अभियान Amazon Now से जुड़ा बताया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि विज्ञापन में आर्यभट्ट जैसी वेशभूषा पहने एक पात्र को “जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक” के रूप में हास्य और व्यंग्य के अंदाज में दिखाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शून्य (Zero) की अवधारणा से जुड़े महान विद्वान की छवि का व्यावसायिक प्रचार के लिए इस तरह इस्तेमाल करना भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।
सोशल मीडिया पर बहिष्कार की मांग
विवाद के बाद सोशल मीडिया पर Amazon के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है। कुछ यूजर्स और संगठनों ने #Boycott_Amazon अभियान चलाते हुए कंपनी से विज्ञापन वापस लेने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में Amazon की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
पुराने विवादों का भी जिक्र
नोटिस में दावा किया गया है कि इससे पहले भी Amazon विभिन्न विवादों में घिर चुका है। संगठन ने आरोप लगाया कि कंपनी के प्लेटफॉर्म पर कभी हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले उत्पादों को लेकर विवाद हुआ था, जबकि कुछ वेब कंटेंट को लेकर भी धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोप लगे थे।
किन धाराओं का हवाला?
नोटिस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि यदि किसी सामग्री से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं या सामाजिक वैमनस्य फैलाने की आशंका होती है, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, किसी भी मामले में संबंधित धाराओं का लागू होना और आरोपों की वैधता का अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों और न्यायालय द्वारा ही किया जाता है।
48 घंटे का अल्टीमेटम
हिंदू जनजागृति समिति ने मांग की है कि:
- विवादित विज्ञापन को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया जाए।
- कंपनी सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
- भविष्य में राष्ट्रीय महापुरुषों और सांस्कृतिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति अपनाए।
- लिखित आश्वासन दिया जाए कि ऐसी विवादित सामग्री दोबारा प्रकाशित नहीं की जाएगी।
फिलहाल यह मामला कानूनी और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। अब नजर Amazon की प्रतिक्रिया और आगे की संभावित कानूनी कार्रवाई पर बनी हुई है।




