एमपी राज्यसभा चुनाव में नया ट्विस्ट: महेश केवट की एंट्री से क्रॉस वोटिंग पर टिकी सबकी नजर
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव ने अचानक दिलचस्प मोड़ ले लिया है। अब तक माना जा रहा था कि दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में आसानी से चली जाएंगी, लेकिन भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। इस फैसले ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राह में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं और राज्य की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार ने बदला चुनावी समीकरण भाजपा ने पहले दो उम्मीदवारों के रूप में तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा था। अब तीसरे प्रत्याशी के तौर पर महेश केवट को टिकट देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह अतिरिक्त समर्थन या संभावित क्रॉस वोटिंग के भरोसे तीसरी सीट पर भी दावा ठोकना चाहती है। इसके साथ ही तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे निर्विरोध चुनाव की संभावना समाप्त हो गई है और अब मतदान के जरिए ही नतीजा तय होगा। कौन हैं महेश केवट? महेश केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। छात्र राजनीति से लेकर स्थानीय निकाय और संगठनात्मक राजनीति तक उनका लंबा अनुभव रहा है। भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर मछुआरा समाज और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और विभिन्न चुनावों में निभाई गई जिम्मेदारियों को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती कांग्रेस ने राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं, लेकिन पार्टी को अपने विधायकों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बन गया है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास फिलहाल 62 वैध वोट माने जा रहे हैं। ऐसे में मामूली क्रॉस वोटिंग भी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। नंबर गेम क्या कहता है? मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी। भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। दो सीटें जीतने के बाद भाजपा के पास लगभग 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन किसी भी तरह की टूट-फूट समीकरण बदल सकती है। कांग्रेस में असंतोष और क्रॉस वोटिंग का खतरा कांग्रेस की मुश्किल सिर्फ संख्या बल तक सीमित नहीं है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदान से रोके जाने और बीना विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा के करीब माने जाने से पार्टी की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा पार्टी के भीतर मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को लेकर असंतोष की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा फोकस अपने विधायकों को एकजुट रखने पर रहेगा। 2020 की यादें फिर ताजा मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस की अंदरूनी टूट का पुराना इतिहास रहा है। मार्च 2020 का राजनीतिक घटनाक्रम आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब राज्यसभा चुनाव से पहले हुए घटनाक्रम ने कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। यही वजह है कि इस बार भी क्रॉस वोटिंग, अनुपस्थित मतदान और आखिरी समय की राजनीतिक रणनीतियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सबसे दिलचस्प मुकाबलों में शामिल हुआ चुनाव भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की एंट्री ने राज्यसभा चुनाव को पूरी तरह से दिलचस्प बना दिया है। अब मुकाबला केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन, पार्टी एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग का बन गया है। आने वाले दिनों में यह चुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित सियासी मुकाबला साबित हो सकता है।

भोपाल. मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव ने अचानक दिलचस्प मोड़ ले लिया है। अब तक माना जा रहा था कि दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में आसानी से चली जाएंगी, लेकिन भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। इस फैसले ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राह में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं और राज्य की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है।
बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार ने बदला चुनावी समीकरण
भाजपा ने पहले दो उम्मीदवारों के रूप में तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा था। अब तीसरे प्रत्याशी के तौर पर महेश केवट को टिकट देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह अतिरिक्त समर्थन या संभावित क्रॉस वोटिंग के भरोसे तीसरी सीट पर भी दावा ठोकना चाहती है।
इसके साथ ही तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे निर्विरोध चुनाव की संभावना समाप्त हो गई है और अब मतदान के जरिए ही नतीजा तय होगा।
कौन हैं महेश केवट?
महेश केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। छात्र राजनीति से लेकर स्थानीय निकाय और संगठनात्मक राजनीति तक उनका लंबा अनुभव रहा है।
भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर मछुआरा समाज और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और विभिन्न चुनावों में निभाई गई जिम्मेदारियों को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
कांग्रेस ने राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं, लेकिन पार्टी को अपने विधायकों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास फिलहाल 62 वैध वोट माने जा रहे हैं। ऐसे में मामूली क्रॉस वोटिंग भी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
नंबर गेम क्या कहता है?
मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं।
- एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी।
- भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है।
- दो सीटें जीतने के बाद भाजपा के पास लगभग 48 वोट बचेंगे।
- तीसरी सीट के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी।
- कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन किसी भी तरह की टूट-फूट समीकरण बदल सकती है।
कांग्रेस में असंतोष और क्रॉस वोटिंग का खतरा
कांग्रेस की मुश्किल सिर्फ संख्या बल तक सीमित नहीं है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदान से रोके जाने और बीना विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा के करीब माने जाने से पार्टी की चिंता बढ़ गई है।
इसके अलावा पार्टी के भीतर मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को लेकर असंतोष की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा फोकस अपने विधायकों को एकजुट रखने पर रहेगा।
2020 की यादें फिर ताजा
मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस की अंदरूनी टूट का पुराना इतिहास रहा है। मार्च 2020 का राजनीतिक घटनाक्रम आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब राज्यसभा चुनाव से पहले हुए घटनाक्रम ने कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। यही वजह है कि इस बार भी क्रॉस वोटिंग, अनुपस्थित मतदान और आखिरी समय की राजनीतिक रणनीतियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सबसे दिलचस्प मुकाबलों में शामिल हुआ चुनाव
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की एंट्री ने राज्यसभा चुनाव को पूरी तरह से दिलचस्प बना दिया है। अब मुकाबला केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन, पार्टी एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग का बन गया है। आने वाले दिनों में यह चुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित सियासी मुकाबला साबित हो सकता है।




