
पटना. बिहार की बेटियां लगातार देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। नालंदा की रहने वाली पर्वतारोही मिताली प्रसाद ने 12,500 फीट ऊंचे माउंट केदारकांठा को सफलतापूर्वक फतह कर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इस सफलता के साथ उन्होंने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।
माउंट केदारकांठा पर फहराया सफलता का परचम
नालंदा जिले की रहने वाली और पटना यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा Mitali Prasad ने मई 2026 में 12,500 फीट ऊंचे माउंट केदारकांठा की चोटी पर पहुंचकर अपनी पर्वतारोहण यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
इस उपलब्धि के बाद उन्होंने कहा कि चोटी पर पहुंचकर उन्हें बिहार का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व महसूस हुआ। उन्होंने अपनी सफलता को राज्य के युवाओं और खासकर बेटियों को समर्पित करते हुए ‘जय बिहार’ का नारा भी बुलंद किया।
पहले भी हासिल कर चुकी हैं कई बड़ी उपलब्धियां
मिताली प्रसाद का पर्वतारोहण करियर प्रेरणादायक उपलब्धियों से भरा हुआ है। साल 2020 में वह दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटियों में से एक Mount Aconcagua (6,962 मीटर) को अकेले फतह करने वाली भारत की पहली बेटी बनी थीं। इसके अलावा उन्होंने:
- 2022 में Mount Kun (7077 मीटर) पर सफल चढ़ाई की
- एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पूरा किया
- 2019 में Mount Kilimanjaro (5895 मीटर) पर तिरंगा फहराया
- 2020 में माउंट बोनेटे पर भी सफलता हासिल की
पर्वतारोहण से पहले कराटे में भी बनाया नाम
राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर मिताली केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं हैं। वह कराटे में ब्लैक बेल्ट (सेकंड डैन) धारक और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। इसके अलावा:
- एनसीसी एयर स्क्वाड्रन की ‘ए’ ग्रेड कैडेट रही हैं
- आगरा में पैरा बेसिक कोर्स पूरा कर चुकी हैं
- साहसिक खेलों और नेतृत्व गतिविधियों में सक्रिय रही हैं
किसान परिवार की बेटी, बड़े सपनों की उड़ान
मिताली का पैतृक गांव मायापुर, कतरीसराय (नालंदा) के पास स्थित है। उनके माता-पिता किसान हैं और घरेलू उद्योग से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वह बिहार के स्कूली बच्चों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दे रही हैं। साथ ही बिहार प्रशासनिक सेवा (BPSC) की तैयारी भी कर रही हैं और दो बार मुख्य परीक्षा में शामिल हो चुकी हैं।
अब एवरेस्ट फतह करने का सपना
मिताली का अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest को फतह करना है। हालांकि उन्होंने बताया कि आर्थिक संसाधनों की कमी इस सपने के रास्ते में बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद उनका संकल्प अटूट है। वह चाहती हैं कि बिहार के अधिक से अधिक बच्चे, विशेषकर बेटियां, पर्वतारोहण और साहसिक खेलों में आगे आएं।
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मिताली प्रसाद की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता बिहार की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।




