राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज; BJP के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध तय!
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज। भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ, कांग्रेस कोर्ट जाने की तैयारी में।
भोपाल. मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के दौरान निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध राज्यसभा पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। नामांकन रद्द होने को लेकर कांग्रेस ने लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे चुनावी नियमों की जीत करार दिया है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों हुआ खारिज?
राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर रद्द कर दिया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी थी।
बताया गया कि 2025 में हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा एक निजी शिकायत के आधार पर उन्हें BNSS की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया गया था। भाजपा ने इसी तथ्य को छिपाने का आरोप लगाते हुए नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
साढ़े चार घंटे चली सुनवाई, भाजपा की आपत्ति स्वीकार
भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ आपत्ति दायर की थी। उनका आरोप था कि प्रत्याशी ने अदालत से जारी नोटिस की जानकारी शपथ पत्र में दर्ज नहीं की।
करीब साढ़े चार घंटे तक चली कानूनी सुनवाई के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति को सही मानते हुए कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन निरस्त कर दिया।
भाजपा के तीनों उम्मीदवारों की राह आसान
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। भाजपा के अन्य दो उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल भी निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जाने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
कांग्रेस का हमला, कहा- लोकतंत्र की हत्या
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने फैसले को असंवैधानिक बताते हुए भाजपा पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में जो हुआ है उससे उसकी वास्तविक सोच सामने आ गई है। कांग्रेस ने इस फैसले के विरोध में प्रदेशभर में भूख हड़ताल करने का भी ऐलान किया है।
उमंग सिंघार बोले- जब विधायक नहीं टूटे तो नियमों का सहारा लिया
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा को पहले से पता था कि कांग्रेस के 62 विधायक एकजुट हैं और क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है। उनका कहना था कि जब कांग्रेस विधायक नहीं टूटे तो नामांकन प्रक्रिया को विवादित बनाकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की गई।
मीनाक्षी नटराजन ने उठाए गंभीर सवाल
नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शुरू से ही तीसरा उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक रणनीति बनाई थी और जब कांग्रेस विधायक एकजुट दिखे तो कानूनी नोटिस को आधार बनाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
कोर्ट जाएगी कांग्रेस?
कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि हैदराबाद कोर्ट द्वारा जारी नोटिस केवल सुनवाई का अवसर देने की प्रक्रिया थी, न कि किसी आपराधिक मामले में आरोपी घोषित करने का आदेश। उन्होंने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का आदेश कानून और न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है तथा कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।
नामांकन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने दावा किया कि नामांकन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए गए थे और अधिकारियों की चेकलिस्ट में भी किसी प्रकार की कमी दर्ज नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिन्होंने निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा से एयरपोर्ट तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
मंगलवार को भोपाल में पूरे दिन राजनीतिक हलचल देखने को मिली। विधानसभा परिसर में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
उधर, कांग्रेस अपने विधायकों को संभावित क्रॉस वोटिंग से बचाने के लिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए चार्टर्ड विमान भी तैयार था, लेकिन उड़ान में हुई देरी और नामांकन रद्द होने की खबर के बाद यह योजना रद्द कर दी गई।
CM मोहन यादव ने फैसले का किया स्वागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि चुनावी हलफनामे में पूरी जानकारी देना प्रत्याशी की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को पहले से पता था कि उसका उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाएगा, इसलिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई।




