CM साय की फटकार का असर! MCB के DEO आरपी मिरे हटाए गए, रविकांत यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी
CM विष्णुदेव साय की नाराजगी के बाद MCB जिले के DEO आरपी मिरे को पद से हटाया गया। खराब बोर्ड परीक्षा परिणामों के बीच रविकांत यादव को नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी तबादला आदेश में कई जिला शिक्षा अधिकारियों और प्राचार्यों के प्रभार बदले गए हैं। इस सूची में सबसे चर्चित कार्रवाई मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में हुई, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नाराजगी और जिले के खराब बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे को पद से हटा दिया गया है।
खराब बोर्ड रिजल्ट के बाद सरकार का बड़ा फैसला
हाल ही में घोषित कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में MCB जिला पूरे प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर रहा था। जिले के कमजोर प्रदर्शन को लेकर शासन स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे थे। शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई थीं।
सुशासन तिहार में CM साय ने जताई थी नाराजगी
‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने चिरमिरी में समीक्षा बैठक ली थी। इस दौरान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और जिले की शैक्षणिक स्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। बताया जाता है कि बैठक में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे को लापरवाही और खराब प्रदर्शन को लेकर फटकार भी लगी थी।
आरपी मिरे हटाए गए, लोक शिक्षण संचालनालय भेजे गए
शासन के नए आदेश के तहत आरपी मिरे को जिला शिक्षा अधिकारी पद से हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय के विकल्प पर रखा गया है। इसे जिले की खराब शैक्षणिक स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।
रविकांत यादव बने नए प्रभारी DEO
जिले की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शासन ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी रविकांत यादव पर भरोसा जताया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है।
नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौती
रविकांत यादव के सामने जिले की गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने, स्कूलों की मॉनिटरिंग मजबूत करने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम दिलाने की बड़ी चुनौती होगी। सरकार की प्राथमिकता अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सुशासन के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करना है।




