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TMC-DMK में उथल-पुथल से BJP को फायदा? महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बदला सियासी गणित

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर फिर बढ़ी सियासी हलचल। TMC में बगावत, DMK के बदले रुख और राज्यसभा चुनावों के बीच BJP की उम्मीदें क्यों बढ़ रही हैं, जानिए पूरा राजनीतिक समीकरण।

नई दिल्ली. देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल चर्चा के केंद्र में हैं। जिन विधेयकों को पहले संसद में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था, अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उनके दोबारा पेश होने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ती बगावत और डीएमके के कथित नरम रुख ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल फिर चर्चा में

केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगामी मानसून सत्र में फिर से संसद में पेश कर सकती है। पिछली बार इन विधेयकों को आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया था, जिससे सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा था।

महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, जबकि परिसीमन विधेयक लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा हुआ है।

TMC और DMK की भूमिका क्यों अहम?

पिछली बार इन विधेयकों के विरोध में विपक्षी दलों की एकजुटता महत्वपूर्ण रही थी। खासकर Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress और Dravida Munnetra Kazhagam ने सरकार की राह मुश्किल बनाई थी।

अब राजनीतिक हालात बदलने की चर्चा है। टीएमसी में आंतरिक असंतोष और सांसदों की कथित नाराजगी ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया है, जबकि डीएमके के रुख को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हैं।

राज्यसभा चुनाव से बदलेगा समीकरण?

18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों पर भी सभी की नजर है। विभिन्न राज्यों की सीटों के नतीजे उच्च सदन में राजनीतिक दलों की ताकत को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल Bharatiya Janata Party और एनडीए के पास राज्यसभा में मजबूत संख्या है, लेकिन संवैधानिक संशोधन जैसे विधेयकों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में हर अतिरिक्त समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोकसभा में भी बदल रहा नंबर गेम

लोकसभा में भी विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती असहमति राजनीतिक गणित को प्रभावित कर सकती है। टीएमसी के कुछ सांसदों द्वारा अलग गुट की मांग और नेतृत्व को लेकर उठे सवालों ने पार्टी के भीतर अस्थिरता की चर्चा को हवा दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी एकता कमजोर पड़ती है तो सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

क्या BJP के लिए आसान होगी राह?

हालांकि अंतिम तस्वीर संसद में मतदान के दौरान ही साफ होगी, लेकिन मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि सरकार नए सिरे से समर्थन जुटाने की कोशिश में है।

यदि कुछ क्षेत्रीय दल तटस्थ रुख अपनाते हैं या समर्थन देते हैं, तो महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने की संभावना पहले की तुलना में मजबूत हो सकती है।

निष्कर्ष

मानसून सत्र से पहले देश की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरण महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को फिर सुर्खियों में ले आए हैं। टीएमसी में कथित असंतोष, डीएमके के संभावित रुख और राज्यसभा चुनावों के नतीजे आने वाले दिनों में इन विधेयकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Republic News

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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