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थल सेना को मिलेगा ‘फायरपावर बूस्टर’, 300 अतिरिक्त K9 वज्र खरीदने की तैयारी में सरकार

भारतीय सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर तोपें खरीदने की तैयारी में है। इस मेगा डील से चीन और पाकिस्तान सीमा पर भारत की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

भारत अपनी सैन्य शक्ति को लगातार आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वायुसेना और नौसेना के बाद अब केंद्र सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है। इसी कड़ी में भारतीय सेना के लिए करीब 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस सौदे को मंजूरी मिलने पर चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर भारतीय सेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा।

चीन-पाकिस्तान दोनों मोर्चों के लिए रणनीतिक तैयारी

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। पहले वायुसेना को 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले, फिर नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई। अब 114 नए राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इसी रणनीति के तहत थल सेना के तोपखाने को और मजबूत करने के लिए K9 वज्र तोपों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

23,000 करोड़ रुपये की खरीद योजना तैयार

रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये है। प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने पेश किया जा सकता है। मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में से एक होगी।

लद्दाख में साबित हुई K9 वज्र की ताकत

K9 वज्र को मूल रूप से रेगिस्तानी और मैदानी क्षेत्रों में युद्ध संचालन के लिए विकसित किया गया था। हालांकि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसकी तैनाती ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में भी की गई। कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में इसके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने सेना का भरोसा और मजबूत किया है। यही वजह है कि सेना अब इसकी संख्या बढ़ाने के पक्ष में है।

क्या हैं K9 वज्र-टी की खासियतें?

K9 वज्र-टी एक आधुनिक 155 मिमी, 52 कैलिबर स्वचालित हॉवित्जर तोप है। यह ट्रैक आधारित प्लेटफॉर्म पर संचालित होती है, जिससे टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता “शूट एंड स्कूट” क्षमता है। यानी दुश्मन पर गोले दागने के तुरंत बाद यह अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है। आधुनिक युद्ध में इस तकनीक को बेहद प्रभावी माना जाता है।

सेना के पास पहले से मौजूद हैं 200 K9 वज्र

भारतीय सेना के पास वर्तमान में 100 K9 वज्र तोपें सेवा में हैं। इसके अलावा वर्ष 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी, जिसकी लागत 7,629 करोड़ रुपये थी। यदि 300 नई तोपों का प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो भारतीय सेना के पास K9 वज्र का बड़ा बेड़ा तैयार हो जाएगा, जिससे तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी।

आत्मनिर्भर भारत को भी मिलेगा बल

K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है। इसे Larsen & Toubro और Hanwha Aerospace की साझेदारी में तैयार किया जाता है। परियोजना में स्वदेशी सामग्री का उपयोग लगातार बढ़ाया गया है, जिससे यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

Republic News

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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