दुनिया

होर्मुज संकट के बीच चीन का मास्टरस्ट्रोक! बना रहा दुनिया का सबसे बड़ा LNG जहाज, गैस सप्लाई को मिलेगा नया सहारा

होर्मुज संकट के बीच चीन दुनिया का सबसे बड़ा LNG कैरियर बना रहा है। 2.71 लाख क्यूबिक मीटर क्षमता वाला यह जहाज वैश्विक गैस सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती दे सकता है।

नई दिल्ली. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच चीन ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) कैरियर के निर्माण में जुटी है। 2.71 लाख क्यूबिक मीटर क्षमता वाला यह विशाल जहाज वैश्विक गैस सप्लाई चेन को मजबूती देने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा के नए समीकरण भी तय कर सकता है।

होर्मुज संकट के बीच क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर मंडराते खतरे ने दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति की संवेदनशीलता का एहसास कराया है। वैश्विक तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग में बाधा आती है तो एशिया और यूरोप के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में LNG परिवहन क्षमता बढ़ाना केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत भी बन गया है।

कितना विशाल होगा चीन का नया LNG कैरियर?

चीन द्वारा तैयार किया जा रहा यह मेगा LNG जहाज 344 मीटर लंबा होगा और इसकी कुल क्षमता 2,71,000 क्यूबिक मीटर LNG होगी। तुलना करें तो वर्तमान में उपयोग होने वाले अधिकांश आधुनिक LNG कैरियर लगभग 1,70,000 से 1,80,000 क्यूबिक मीटर गैस परिवहन करते हैं। इस लिहाज से नया जहाज मौजूदा मानकों की तुलना में करीब 57 प्रतिशत अधिक LNG एक ही यात्रा में ढो सकेगा। इससे परिवहन लागत कम होगी और गैस सप्लाई अधिक प्रभावी एवं किफायती बन सकेगी।

LNG जहाजों को क्यों कहा जाता है ‘क्राउन ज्वेल’?

LNG कैरियर निर्माण शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री की सबसे जटिल और उन्नत तकनीकों में से एक माना जाता है। प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तरल रूप में सुरक्षित रखना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

इसके लिए विशेष क्रायोजेनिक टैंक, उन्नत इंसुलेशन सिस्टम और हाई-टेक सुरक्षा तकनीकों की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि LNG कैरियर को शिपबिल्डिंग उद्योग का ‘क्राउन ज्वेल’ कहा जाता है।

आधुनिक तकनीक से लैस होगा जहाज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मेगा LNG कैरियर में NO96 Super+ मेम्ब्रेन कंटेनमेंट सिस्टम लगाया जाएगा। यह तकनीक गैस को सुरक्षित रखने, ऊर्जा हानि कम करने और रिसाव के जोखिम को घटाने में मदद करती है। इसके अलावा जहाज में डुअल-फ्यूल इंजन सिस्टम होगा, जो LNG और पारंपरिक ईंधन दोनों पर संचालित हो सकेगा।

पर्यावरण के लिहाज से भी खास

कंपनी का दावा है कि डुअल-फ्यूल तकनीक के कारण जहाज ईंधन दक्षता बढ़ाएगा और कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के Tier-III पर्यावरण मानकों का पालन करेगा।

ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के दौर में LNG को कोयले और पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ विकल्प माना जाता है। इसलिए इसकी ढुलाई क्षमता बढ़ना पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

LNG शिपबिल्डिंग में बढ़ रही चीन की पकड़

एक समय LNG जहाज निर्माण उद्योग पर दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देशों की कंपनियों का दबदबा था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक LNG शिपबिल्डिंग बाजार में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनियों के पास आने वाले वर्षों के लिए दर्जनों जहाजों के ऑर्डर पहले से मौजूद हैं।

ऊर्जा सुरक्षा की नई तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो बड़े LNG कैरियर भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा बन जाएंगे। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों के लिए LNG आयात ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अधिक क्षमता वाले जहाज वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बना सकते हैं।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button