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Vastu Tips: घर की इस दिशा में बना टॉयलेट बन सकता है आर्थिक संकट की वजह, जानें आसान उपाय

Vastu Tips: क्या आपके घर में उत्तर दिशा में टॉयलेट बना है? जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम की सही दिशा, आर्थिक नुकसान के संकेत और आसान उपाय।

आज के आधुनिक दौर में लोग घर बनाते समय सुविधाओं और आधुनिक डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन कई बार वास्तु के महत्वपूर्ण नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसका असर धीरे-धीरे परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर दिखाई देने लगता है। विशेष रूप से बाथरूम और टॉयलेट की दिशा को वास्तु शास्त्र में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।

90 के दशक के बाद घरों में अटैच्ड बाथरूम का चलन तेजी से बढ़ा है। अब लगभग हर कमरे के साथ अलग बाथरूम बनाया जाता है। हालांकि यह सुविधा और प्राइवेसी के लिहाज से बेहतर है, लेकिन यदि इसकी दिशा गलत हो तो वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। आइए जानते हैं पंडित कमल नंदलाल जी के अनुसार बाथरूम की सही और गलत दिशा के बारे में।

उत्तर दिशा में टॉयलेट क्यों माना जाता है अशुभ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है। यदि टॉयलेट गलत दिशा में बना हो तो यह जीवन में कई प्रकार की परेशानियों को जन्म दे सकता है। खासकर उत्तर दिशा में बना टॉयलेट गंभीर वास्तु दोष की श्रेणी में आता है।

उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना गया है, जो धन और समृद्धि के देवता हैं। यह दिशा धन आगमन और आर्थिक अवसरों का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में यदि यहां टॉयलेट बना हो तो व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। कमाई अच्छी होने के बावजूद धन संचय नहीं हो पाता और खर्च बढ़ने लगते हैं।

घर के केंद्र में भूलकर भी न बनाएं बाथरूम

वास्तु शास्त्र में घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहा जाता है। यह स्थान ऊर्जा का मुख्य केंद्र माना जाता है। इसलिए घर के बिल्कुल बीच में कभी भी बाथरूम या टॉयलेट नहीं बनाना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है।

बाथरूम और टॉयलेट की शुभ दिशा कौन-सी है?

  • दक्षिण-पश्चिम के बाहरी हिस्से में बनाएं टॉयलेट: यदि उत्तर-पश्चिम दिशा में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, तो दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा के बीच वाले हिस्से यानी South of South-West (SSW) में टॉयलेट बनाया जा सकता है। वास्तु के अनुसार यह स्थान अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है।
  • केवल स्नानघर के लिए पूर्व और उत्तर दिशा बेहतर: यदि आप केवल स्नानघर (Bathroom) बना रहे हैं और उसमें टॉयलेट सीट नहीं है, तो पूर्व या उत्तर दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इन दिशाओं से आने वाली सुबह की धूप और सकारात्मक ऊर्जा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है।

उत्तर दिशा में टॉयलेट है तो करें यह आसान उपाय

यदि आपके घर में पहले से उत्तर दिशा में टॉयलेट बना हुआ है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार एक सरल उपाय से इसके नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके लिए हरे रंग की कांच की बोतल में मनी प्लांट लगाकर घर की उत्तर दिशा में रखें। माना जाता है कि यह उपाय उत्तर दिशा की ऊर्जा को संतुलित करता है और वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।

निष्कर्ष: घर की संरचना में दिशा का विशेष महत्व माना गया है। यदि बाथरूम और टॉयलेट सही दिशा में बनाए जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जबकि गलत दिशा में बने टॉयलेट आर्थिक और मानसिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में घर बनाते या खरीदते समय वास्तु नियमों पर ध्यान देना लाभकारी साबित हो सकता है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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