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अमेरिका में ‘गुलाबी कोकीन’ का खौफ, सेवन करते ही शरीर पड़ता है नीला

अमेरिका में पिंक कोकीन (Tuci) तेजी से फैल रहा है। ट्रंप प्रशासन की सख्ती के बावजूद यह जानलेवा ड्रग क्लबों से गांवों तक पहुंच चुका है, जिससे स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चल रहा है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य कार्रवाई और बड़ी जब्तियां—सब कुछ जारी है।

लेकिन इन प्रयासों के बावजूद अमेरिका में एक नया और बेहद खतरनाक ड्रग तेजी से पैर पसार रहा है—पिंक कोकीन, जिसे तुसी (Tuci) भी कहा जाता है। Axios की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह ड्रग अब क्लबों और हाई-प्रोफाइल पार्टियों से निकलकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, जिससे स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

पिंक कोकीन आखिर है क्या?

नाम के बावजूद यह असल में कोकीन नहीं है। यह कई नशीले पदार्थों का खतरनाक कॉकटेल है। ज्यादातर मामलों में इसमें—

  • केटामाइन (डिसोसिएटिव ड्रग)
  • एमडीएमए / एक्सटेसी

पाए जाते हैं। जांच में कई बार इसमें मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स और यहां तक कि फेंटानिल जैसे घातक तत्व भी मिले हैं।
इसे आकर्षक दिखाने के लिए गुलाबी फूड कलर मिलाया जाता है, जिससे यह “कूल” और फैशनेबल लगता है। यही वजह है कि हर बैच अलग होता है—कोई हल्का असर करता है, तो कोई सीधे जानलेवा साबित हो जाता है।

यह ड्रग नहीं, जहर है

ओवरडोज की स्थिति में:

  • सांस रुक सकती है
  • दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है
  • शरीर में ऑक्सीजन की कमी से स्यानोसिस (Cyanosis) यानी शरीर का नीला पड़ना हो सकता है
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिंक कोकीन का असर बेहद अनिश्चित और खतरनाक है।

बड़े शहरों से गांवों तक फैलाव

हाल के महीनों में लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स जैसे शहरों में पिंक कोकीन को लेकर छापे और चेतावनियां जारी की गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 के बीच कई मौतों को इससे जोड़ा गया है। 2024 की शुरुआत से अब तक चार राज्यों में कम से कम 18 गंभीर मामले सामने आए, जिनमें अधिकांश पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कहां से हुई शुरुआत?

माना जाता है कि पिंक कोकीन की शुरुआत कोलंबिया से हुई, जहां इसे क्लब और पार्टी ड्रग के रूप में पेश किया गया।
यह ‘2C’ नामक साइकेडेलिक ड्रग से प्रेरित थी और तुसी नाम के साथ गुलाबी रंग को इसकी ब्रांडिंग बना दिया गया। बाद में यह लैटिन अमेरिका से होते हुए अमेरिका और यूरोप तक फैल गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब यह सिर्फ एक ड्रग नहीं बल्कि एक “कॉन्सेप्ट” बन चुका है—तस्कर उपलब्ध नशों को मिलाकर हर बार नया बैच तैयार कर लेते हैं।

इलाज क्यों है मुश्किल?

सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिंक कोकीन का कोई तय इलाज या एंटीडोट नहीं है। डॉक्टर और फर्स्ट रिस्पॉन्डर सिर्फ सपोर्टिव ट्रीटमेंट दे सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए। कई मामलों में मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अब इसके मामले सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों से भी सामने आने लगे हैं।

Republic News

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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