रांची. राजधानी रांची में मानसून की दस्तक और बदलते मौसम के बीच सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बाजार में टमाटर से लेकर अधिकांश हरी सब्जियां 40 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं, जबकि फ्रेंच बीन के दाम 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
महंगाई का सबसे ज्यादा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जहां पहले 300 रुपये में कई दिनों की सब्जियां आ जाती थीं, वहीं अब 500 रुपये खर्च करने के बाद भी थैला पूरा नहीं भर पा रहा है।
एक हफ्ते में दोगुनी हुई कई सब्जियों की कीमत
सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी फ्रेंच बीन में देखने को मिली है, जो 40 से 50 रुपये प्रति पाव यानी 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
मानसून और कम आपूर्ति बनी वजह
रांची में सब्जियों की आपूर्ति मुख्य रूप से Bundu, Tamar, Jonha, Silli, Jhalda और Bero जैसे क्षेत्रों से होती है।
यह सब्जियां शहर की प्रमुख मंडियों जैसे Naga Baba Khatal Market, Morabadi Market, Lalpur Market, Doranda Market और रेलवे स्टेशन बाजार तक पहुंचती हैं।
व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद खेती और उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे बाजार में आपूर्ति घट जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं।
रांची में सब्जियों के ताजा रेट
| सब्जी | कीमत (रुपये प्रति किलो) |
|---|---|
| फ्रेंच बीन | 150-200 |
| टमाटर | 50-70 |
| झींगी/तोरई | 40-60 |
| खीरा | 30-40 |
| भिंडी | 30-40 |
| कद्दू | 20 |
| सफेद आलू | 15 |
| लाल आलू | 20 |
| प्याज | 25 |
| बैंगन | 40 |
| पटल | 40 |
| शिमला मिर्च | 50-70 |
| बोदी | 40 |
गृहिणियों का छलका दर्द
सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की रसोई पर सीधा असर डाला है। कई गृहिणियों का कहना है कि पहले रोजाना 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद भी दो दिन का सामान मुश्किल से आ रहा है।
एक गृहिणी ने बताया कि पहले घर में टमाटर की चटनी और सलाद नियमित बनते थे, लेकिन अब महंगे टमाटर के कारण सब्जी में केवल आधा टमाटर ही इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वहीं कुछ परिवारों ने महंगी सब्जियां खरीदना ही कम कर दिया है।
नई फसल आने तक राहत के आसार कम
सब्जी कारोबारियों का मानना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं पहुंचती, तब तक कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में बारिश के शुरुआती दौर में सब्जियों की महंगाई आम लोगों की जेब पर और दबाव बना सकती है।




