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‘हिंदू ग्रोथ रेट’ नहीं, ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ था! NDA बैठक में PM मोदी का विपक्ष पर बड़ा हमला

NDA बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था। जानिए उनके बयान की बड़ी बातें और इसके राजनीतिक मायने।

नई दिल्ली. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में दशकों तक चली धीमी आर्थिक विकास दर को ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहना गलत था, क्योंकि इसके लिए जिम्मेदार तत्कालीन कांग्रेस सरकारों की आर्थिक नीतियां थीं। उनके अनुसार इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था।

‘हिंदू ग्रोथ रेट’ पर PM मोदी का बड़ा बयान

NDA बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान देश को यह विश्वास दिलाया गया कि भारत तेज गति से विकास नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि धीमी आर्थिक वृद्धि के लिए कांग्रेस की नीतियां जिम्मेदार थीं, लेकिन इसका ठीकरा देश की संस्कृति और हिंदू समाज के सिर फोड़ दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यशैली कांग्रेस की थी, जिम्मेदारी कांग्रेस की थी और विफलता भी कांग्रेस की थी, लेकिन इसका नाम ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ रखकर बहुसंख्यक समाज को बदनाम किया गया।

‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर बताया

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने जिस गति से विकास किया है, वह पूर्ववर्ती दशकों की तुलना में अलग तस्वीर पेश करता है।

उन्होंने कहा कि जहां पहले की व्यवस्था लोगों को इंतजार करवाती थी, वहीं वर्तमान व्यवस्था परिणाम देने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री के अनुसार 2014 से 2026 तक का भारत तेज बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल परिवर्तन और बड़े पैमाने पर योजनाओं के क्रियान्वयन का उदाहरण है।

क्या है ‘हिंदू ग्रोथ रेट’?

‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर 1950 से 1980 के बीच भारत की लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर के लिए किया जाता रहा है।

यह शब्द प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री Raj Krishna से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने इस शब्द का प्रयोग भारत की धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक रूप में समझाने के लिए किया था। बाद में यह शब्द आर्थिक और राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गया।

PM मोदी ने कांग्रेस को क्यों ठहराया जिम्मेदार?

प्रधानमंत्री का तर्क है कि उस दौर में भारत की अर्थव्यवस्था पर लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण और सीमित निजी निवेश का प्रभाव था। उद्योग स्थापित करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनेक सरकारी अनुमतियों की आवश्यकता होती थी, जिससे आर्थिक गतिविधियों की गति प्रभावित होती थी।

उनका कहना है कि चूंकि इन नीतियों का संचालन कांग्रेस सरकारों के दौरान हुआ, इसलिए धीमी विकास दर के लिए देश की संस्कृति नहीं बल्कि तत्कालीन आर्थिक नीतियां जिम्मेदार थीं।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक उसी दौर में देखी।

उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार सुधार और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कदमों को आर्थिक विकास की नई दिशा देने वाला बताया।

राजनीतिक बहस को मिल सकती है नई धार

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब NDA सरकार अपने 12 वर्षों की उपलब्धियों को जनता के सामने रख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ बनाम ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ की बहस आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श का अहम मुद्दा बन सकती है।

Republic News Desk

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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