इंदौर में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन! महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक के पास मिली 9.5 करोड़ की संपत्ति
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक के ठिकानों पर छापा मारकर 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा किया। आय से 241% अधिक संपत्ति मिलने पर मामला दर्ज।

इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक पर बड़ी कार्रवाई करते हुए आय से अधिक संपत्ति का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि अधिकारी को अपने पूरे सेवाकाल में करीब ढाई करोड़ रुपये वेतन मिला, जबकि उनके पास लगभग 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति पाई गई। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह संपत्ति उनकी वैध आय से 241 प्रतिशत अधिक है।
लोकायुक्त की छापेमार कार्रवाई में बड़ा खुलासा
लोकायुक्त पुलिस की टीम ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक Laxminarayan Kandwal के इंदौर स्थित ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान कई अचल संपत्तियों, व्यावसायिक परिसरों और कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद विशेष योजना बनाकर तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था, जिन्होंने एक मकान, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर पर एक साथ कार्रवाई की।
30 साल की नौकरी में करोड़ों की संपत्ति
जांच में सामने आया कि अधिकारी को वर्ष 1996 से अब तक के सेवाकाल में लगभग 2.5 करोड़ रुपये वेतन के रूप में प्राप्त हुए। वहीं छापे के दौरान करीब 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है।
लोकायुक्त के मुताबिक यह संपत्ति उनकी घोषित आय से करीब 241 प्रतिशत अधिक है, जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आलीशान मकान, प्लॉट और कृषि भूमि का जाल
छापे के दौरान इंदौर की स्कीम-103 में तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में बड़े भूखंडों का भी खुलासा हुआ। जांच में यह संपत्तियां सामने आईं:
- स्कीम-103 में जी+3 भवन
- स्कीम-140 में दो भूखंड
- पीथमपुर क्षेत्र में कई प्लॉट
- सोनवाय, तारापुर, बेकल्या और बनेड़िया में कृषि भूमि
- धार जिले में कई हेक्टेयर जमीन
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपनी अधिकांश पूंजी अचल संपत्तियों में निवेश की थी।
परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गईं संपत्तियां
जांच एजेंसियों के अनुसार कई संपत्तियां पत्नी, बेटों, पुत्रवधु और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई थीं। लोकायुक्त इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन संपत्तियों के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या इनमें बेनामी निवेश शामिल है।
बैंक लॉकर और अन्य निवेशों की जांच जारी
कार्रवाई के दौरान Bank of India की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर का भी पता चला है। अधिकारियों के अनुसार लॉकर को खोलकर उसमें रखी वस्तुओं और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। लोकायुक्त का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर संपत्तियों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
पांच दिन पहले हुई थी इंदौर में पदस्थापना
जानकारी के मुताबिक अधिकारी की इंदौर में पदस्थापना महज पांच दिन पहले हुई थी। इससे पहले वे झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास सहित कई जिलों में पदस्थ रह चुके हैं। अब विभागीय स्तर पर उनके निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर का भी मिला सुराग
छापे के दौरान अधिकारियों को एक दो मंजिला आधुनिक जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन प्रतिष्ठानों का संचालन परिवार के सदस्य करते थे। जांच एजेंसियां इनके वित्तीय लेनदेन और निवेश के स्रोतों की भी पड़ताल कर रही हैं।




