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भारत में अपराध 6% घटे, लेकिन साइबर क्राइम का खतरा बढ़ा; SBI रिपोर्ट में 1 लाख मामलों का अनुमान

SBI Crime Report 2024 के अनुसार भारत में कुल अपराध दर 6% घटी है, लेकिन साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। जानिए महिलाओं की सुरक्षा, CCTV निगरानी और अर्थव्यवस्था पर रिपोर्ट के बड़े खुलासे।

नई दिल्ली. भारत में अपराध की तस्वीर तेजी से बदल रही है। एक ओर पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध नई और गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देश की कुल अपराध दर में 6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती गतिविधियों के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में अपराध, तकनीक, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच गहरे संबंधों को भी उजागर किया गया है।

देश में अपराध दर में 6 फीसदी की गिरावट

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत में 58.86 लाख संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत कम हैं। इसी अवधि में देश की अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से घटकर 418.9 रह गई। रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और बेहतर निगरानी तंत्र ने अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

साइबर क्राइम बना सबसे बड़ी चिंता

हालांकि कुल अपराधों में कमी आई है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। SBI का अनुमान है कि देश में साइबर क्राइम के मामले जल्द ही 1 लाख का आंकड़ा पार कर सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर ठगी, फिशिंग, डेटा चोरी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में मामूली कमी

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में हल्की गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2023 में जहां ऐसे 4.48 लाख मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 4.41 लाख रह गई। हालांकि SBI ने स्पष्ट किया है कि यह कमी चुनौती के स्तर को कम नहीं करती और महिलाओं की सुरक्षा अभी भी बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।

UPI और FASTag से अपराधियों पर बढ़ा दबाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI, FASTag और अन्य डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। डिजिटल ट्रेल के कारण अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले से अधिक हो गई है। इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं।

CCTV निगरानी से अपराध नियंत्रण में मदद

SBI रिपोर्ट के अनुसार जिन क्षेत्रों में CCTV कैमरों की संख्या अधिक है, वहां अपराध दर में गिरावट देखी गई है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया। इसका अर्थ है कि निगरानी बढ़ने पर अपराध कम होने की संभावना बढ़ जाती है।

स्मार्ट सिटी मिशन ने मजबूत की सुरक्षा व्यवस्था

देश के 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं। इन शहरों में 84 हजार से अधिक CCTV कैमरे, 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये सुविधाएं नागरिकों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं।

अपराध का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर

रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच गहरा संबंध बताया गया है। अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं। SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर वास्तविक GDP वृद्धि दर में लगभग 0.11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।

महिलाओं की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का संबंध

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि आर्थिक विकास से भी जुड़ा मुद्दा है। NCRB 2024 के आंकड़ों के मुताबिक पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1.20 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि लगभग 24 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया। इससे महिला श्रम भागीदारी और आर्थिक उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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