स्कूल के बच्चे की सच्ची कहानी, CM यादव और टीचर सेन हुए प्रभावित
स्कूल में अनुशासित और नेतृत्व क्षमता से भरपूर छात्र रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। उनकी शिक्षिका कोकिला सेन ने साझा किए छात्र जीवन के रोचक और प्रेरक किस्से।

भोपाल. कक्षा 9 का एक अनुशासित, शांत और जिम्मेदार छात्र, जो हमेशा अपने साथियों की बात शिक्षकों तक पहुंचाने में आगे रहता था, आज मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री है। स्कूल के दिनों से ही उसमें नेतृत्व क्षमता स्पष्ट नजर आने लगी थी।
बुधवार को राजधानी भोपाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी शिक्षिका कोकिला सेन का सम्मान किया। सम्मान समारोह के बाद शिक्षिका कोकिला सेन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में उनके छात्र जीवन से जुड़े कई रोचक प्रसंग साझा किए।
स्कूल के दिनों में ही उभर आया था नेतृत्व
उज्जैन की शासकीय जीवाजीगंज स्कूल में वर्ष 1979 से 1981 तक फिजिक्स पढ़ाने वाली शिक्षिका कोकिला सेन बताती हैं कि कक्षा 9 से 12 तक मोहन यादव पढ़ाई में गंभीर और व्यवहार में अत्यंत जिम्मेदार छात्र रहे। यदि किसी छात्र को शिक्षकों तक कोई बात पहुंचानी होती, तो सभी उसी को आगे करते थे। यह भरोसा उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता था।
शांत, विनम्र और अनुशासित छात्र
कोकिला सेन के अनुसार, मोहन यादव कभी शोरगुल या शरारत नहीं करते थे। समय पर कक्षा में बैठना, ध्यानपूर्वक पढ़ाई करना और शिक्षकों के प्रति सम्मान रखना उनकी आदत में शामिल था। वे हंसते हुए कहती हैं कि ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षक बदलने की जरूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें और आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
पढ़ाई के साथ खेल और गतिविधियों में भी संतुलन
शिक्षिका बताती हैं कि वे केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं थे। खेलकूद और अन्य सह-पाठ्य गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। मैदान और प्रयोगशाला—दोनों जगह उनका संतुलन देखने को मिलता था, जो कम ही छात्रों में दिखाई देता है।
बायोलॉजी में थी विशेष रुचि
फिजिक्स की छात्रा होने के बावजूद शिक्षिका कोकिला सेन बताती हैं कि मोहन यादव की विशेष रुचि बायोलॉजी में थी। बायोलॉजी लैब फिजिक्स लैब के पास होने के कारण वे अक्सर वहां जाकर मॉडल और प्रैक्टिकल को ध्यान से देखते थे। उनका मानना था कि किसी भी विषय को डरावना मानने के बजाय उसे समझने का प्रयास करना चाहिए।
“बहुत सी कुर्सियां आपका इंतजार कर रही हैं”
कोकिला सेन ने एक स्मरणीय किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब मोहन यादव शिक्षा मंत्री बने थे, तब एक कार्यक्रम में मुलाकात के दौरान उन्होंने स्वयं को शिक्षा मंत्री बताया। इस पर उन्होंने कहा था— “यह तो शुरुआत है, आगे बहुत सी कुर्सियां बेटा आपका इंतजार कर रही हैं।”
आज वह कथन सच साबित हो चुका है।
आज भी वैसा ही व्यवहार, जैसा स्कूल में था
शिक्षिका कहती हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी मोहन यादव के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।
शिक्षकों के प्रति सम्मान, विनम्रता और सहजता—ये गुण आज भी वैसे ही हैं, जैसे वे स्कूल के दिनों में थे। उनके अनुसार, बचपन में विकसित हुए संस्कार जीवन भर व्यक्ति के साथ रहते हैं।




