छत्तीसगढ़

धान छोड़ करेले की खेती से चमकी किस्मत: महासमुंद के किसान दीपक ने कमाए 2.95 लाख रुपये, बने मिसाल

महासमुंद के किसान दीपक ने पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक तकनीकों से करेले की खेती अपनाई। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग के जरिए उन्हें 2.95 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, जो धान की तुलना में 7 गुना अधिक है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बंसुलीडीह के प्रगतिशील किसान दीपक ने इसकी मिसाल पेश की है। स्नातकोत्तर शिक्षित दीपक ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत करेले की व्यावसायिक खेती अपनाई और एक ही सीजन में 2.95 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

धान की खेती से सीमित आय, करेले ने खोले कमाई के नए रास्ते

दीपक पहले अपनी 1 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे। धान उत्पादन से उन्हें सालभर में करीब 42,300 रुपये का शुद्ध लाभ मिलता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने करेले की खेती शुरू की। परिणामस्वरूप इस सीजन में उन्हें लगभग 2.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो धान की खेती से मिलने वाले मुनाफे की तुलना में 7 गुना से अधिक है।

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग बनी सफलता की कुंजी

किसान दीपक की सफलता के पीछे आधुनिक कृषि तकनीकों का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत कृषि उपकरणों का उपयोग कर खेती की लागत को नियंत्रित किया और उत्पादन क्षमता बढ़ाई। इन तकनीकों से पानी की बचत हुई, फसल स्वस्थ रही और उत्पादन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

प्रति एकड़ 18 टन उत्पादन, बाजार में मिला बेहतर दाम

आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से दीपक को प्रति एकड़ लगभग 18 टन करेले का उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर गुणवत्ता के कारण उनकी उपज को बाजार में औसतन 30 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य मिला। उन्होंने अपनी फसल को सरायपाली मंडी के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा के प्रमुख बाजारों में भी बेचा, जहां इसकी अच्छी मांग रही।

आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव

दीपक का कहना है कि उद्यानिकी खेती अपनाने से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। बढ़ी हुई आय से परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है और भविष्य के लिए नई संभावनाएं खुली हैं। वे लगातार उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में रहकर नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी लेते रहते हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

दीपक की सफलता से प्रभावित होकर ग्राम बंसुलीडीह और आसपास के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर सब्जी एवं फल उत्पादन जैसी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सफल उदाहरण कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Republic News

इस समाचार पोर्टल के लेखक एवं संपादक हैं। दस वर्षों की पत्रकारिता अनुभव से सत्य और संतुलित खबरें पेश करने का जुनून रखते हैं। अपनी टीम के साथ राजनीति, टेक्नोलॉजी, क्राइम और संस्कृति की गहरी कवरेज देते हैं। पाठकों का विश्वास ही इनका मिशन है।

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