पटना. बिहार में हाइवे, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़क परियोजनाओं के निर्माण में अब जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधा नहीं बनेगा। नीतीश कुमार सरकार ने इस दिशा में बड़ी पहल करते हुए विभागीय समन्वय की समस्या को दूर करने का फैसला किया है। पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बीच जमीन से जुड़ी रिपोर्ट मांगने–देने में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
जमीन अधिग्रहण के लिए परियोजनावार अधिकारी तैनात होंगे
सड़क निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए बिहार में अब जमीन अधिग्रहण के काम में परियोजनावार राजस्व अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया है। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि हर बड़ी सड़क परियोजना के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तय हो, ताकि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो सके।
देरी से अटकी थीं कई अहम सड़क परियोजनाएं
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभी सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (डीएलओ) के माध्यम से किया जाता है। जब किसी विशेष परियोजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती है तो संबंधित अधिकारी जिले की सभी परियोजनाओं का हवाला देकर अपनी व्यस्तता बता देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि कई अहम परियोजनाओं में सालों तक जमीन अधिग्रहण पूरा नहीं हो पाता।
एडीएलओ होंगे जिम्मेदार, नहीं बच पाएंगे जवाबदेही से
नई व्यवस्था के तहत राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (एडीएलओ) को नामित किया जाएगा। ये अधिकारी डीएलओ के अधीन काम करेंगे और अनुमंडल में तैनात डीसीएलआर के समकक्ष अधिकारों से लैस होंगे। खासकर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में, जहां केंद्र सरकार की भूमिका अहम होती है, वहां नामित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे।
दोनों विभागों में बनी सहमति, जल्द जारी होगा आदेश
सूत्रों के मुताबिक, पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बीच इस प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है। एडीएलओ न सिर्फ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया देखेंगे, बल्कि केंद्र सरकार, पथ निर्माण विभाग और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है।




