शादी में हो रही देरी? जल्द विवाह के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय
शादी में आ रही रुकावट दूर करने के लिए अपनाएं ये आसान धार्मिक उपाय। 16 सोमवार व्रत, पूजा-पाठ और परंपरागत टोटकों से मिल सकता है मनचाहा जीवनसाथी।
जिन लड़कियों की शादी की उम्र हो चुकी है, लेकिन मनचाहा वर नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए कुछ धार्मिक और पारंपरिक उपाय बेहद लाभकारी माने जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए ये उपाय विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं।
16 सोमवार का व्रत रखें
मनचाहा वर पाने के लिए 16 सोमवार का व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है। नए साल में पहले सोमवार से इसकी शुरुआत की जा सकती है। हर सोमवार शिव मंदिर जाएं, शिवलिंग पर जल अर्पित करें, व्रत कथा पढ़ें और भगवान शिव व माता पार्वती का आशीर्वाद लें।
छुआरे सिरहाने रखकर सोएं
शुक्रवार की रात आठ छुआरे जल में उबाल लें। इन्हें जल सहित अपने सिरहाने रखकर सोएं। शनिवार सुबह स्नान के बाद किसी बहते जल में, मनचाहे जीवनसाथी का स्मरण करते हुए, इन्हें प्रवाहित कर दें।
हल्दी मिले पानी से स्नान
जिन कन्याओं को विवाह प्रस्ताव मिलने में देरी हो रही है, वे रोज नहाने के पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें। मान्यता है कि इससे विवाह के योग प्रबल होते हैं।
मंदिर में चढ़ाएं लाल गुलाब
मंगलवार के दिन देवी मंदिर में लाल गुलाब अर्पित करें और व्रत रखें। यह उपाय लगातार 9 मंगलवार करें। गुलाब के फूलों के बीच कागज पर अपने मनचाहे साथी का नाम लिखकर छुपा दें।
लाल वस्त्र पहनें
यदि परिवार वाले रिश्ता तय करने के लिए कहीं जा रहे हों, तो उस दिन कन्या को लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। घर के सदस्यों को अपने हाथ से मीठा खिलाकर विदा करें। संभव हो तो बाल खुले रखें।
हल्दी लगी रोटियां गाय को खिलाएं
गुरुवार सुबह हल्दी लगी रोटियां बनाएं, प्रत्येक रोटी पर गुड़ रखें और गाय को खिलाएं। लगातार 7 गुरुवार ऐसा करने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। गाय के कान में धीरे से मनचाहे साथी का नाम लें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ
यदि अच्छे घर-परिवार से रिश्ता नहीं मिल पा रहा हो, तो रोज सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। घर या मंदिर में दीप-धूप जलाकर शांत मन से दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
केले के पेड़ की पूजा
हिंदू मान्यताओं में केले का पेड़ अत्यंत पूजनीय है। गुरुवार के दिन केले के वृक्ष के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। 108 नामों का जप करें और संभव हो तो गुरुवार का व्रत भी रखें।




