क्या अफगानिस्तान को ‘डिजिटल अंधेरे’ में धकेल रहा तालिबान? सरकारी कर्मचारियों के स्मार्टफोन पर सख्त बैन
ममता बनर्जी, ऋतब्रत बनर्जी, कलकत्ता हाईकोर्ट, पश्चिम बंगाल विधानसभा, नेता प्रतिपक्ष, टीएमसी, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बंगाल राजनीति, CID जांच, राजनीतिक विवाद

काबुल. अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने डिजिटल संचार पर नियंत्रण को और सख्त करते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। नए आदेश के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी स्मार्टफोन का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसका मोबाइल फोन मौके पर जब्त कर नष्ट किया जा सकता है। साथ ही उसके खिलाफ कानूनी और शरिया कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। इस फैसले ने एक बार फिर तालिबान शासन की नीतियों और अफगानिस्तान में व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
सैन्य अदालतों का आदेश, विशेष अनुमति पर ही मिलेगी छूट
रिपोर्ट्स के अनुसार यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर सामान्य सरकारी कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी को स्मार्टफोन उपयोग करने की विशेष आवश्यकता है, तो उसे तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
ब्रिटिश समाचार संस्था The Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें तालिबान अधिकारियों को आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इन वीडियो को लेकर तालिबान प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
पूरे देश में एक समान लागू नहीं है प्रतिबंध
रिपोर्टों के अनुसार स्मार्टफोन प्रतिबंध अभी पूरे अफगानिस्तान में समान रूप से लागू नहीं किया गया है। कुछ क्षेत्रों में यह केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल जनता की प्रतिक्रिया का आकलन कर रहा है और भविष्य में इस प्रतिबंध को व्यापक स्तर पर लागू करने की कोशिश कर सकता है।
इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं पर पहले भी लगा चुका है शिकंजा
हाल के वर्षों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल संचार माध्यमों पर नियंत्रण बढ़ाने के कई कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा था। आलोचना बढ़ने के बाद कई क्षेत्रों में सेवाएं बहाल करनी पड़ी थीं।
महिलाओं के विरोध प्रदर्शन भी बने चिंता का कारण
विश्लेषकों के अनुसार स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे एक कारण सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाले वीडियो और सूचनाएं भी हो सकती हैं। हाल ही में हेरात में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वायरल हुए थे, जिसके बाद तालिबान को वैश्विक आलोचना का सामना करना पड़ा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर नियंत्रण के जरिए सरकार संवेदनशील घटनाओं की जानकारी के प्रसार को सीमित करना चाहती है।
गोपनीय जानकारी लीक होने की भी चिंता
तालिबान प्रशासन का मानना है कि कुछ सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज, बैठकों की जानकारी और सरकारी निर्णयों को सार्वजनिक कर रहे हैं। कई बार आधिकारिक घोषणा से पहले ही महत्वपूर्ण सूचनाएं सोशल मीडिया पर पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं।
कुछ सरकारी कर्मचारियों ने दावा किया है कि उनके कार्यालयों में महीनों से अनौपचारिक रूप से स्मार्टफोन उपयोग पर रोक थी। एक कर्मचारी के अनुसार मोबाइल लेकर दफ्तर पहुंचने पर उसका फोन जब्त कर लिया गया और बाद में उसे तोड़ दिया गया।
क्या बढ़ेगा अफगानिस्तान का डिजिटल अलगाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन पर व्यापक प्रतिबंध अफगानिस्तान को वैश्विक डिजिटल दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है। उनका कहना है कि कार्यस्थल पर मोबाइल के दुरुपयोग की समस्या कई देशों में मौजूद है, लेकिन इसका समाधान पूर्ण प्रतिबंध नहीं बल्कि संतुलित डिजिटल नीति हो सकता है।
ऐसे में तालिबान का यह कदम आने वाले समय में देश की शिक्षा, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक संपर्क पर किस तरह असर डालेगा, इस पर दुनिया की नजर बनी हुई है।




