MoU साइन होते ही ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! बोले- ईरान के पास कुछ मिसाइलें रह सकती हैं, मचा सियासी बवाल
अमेरिका-ईरान MoU के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें रखने की अनुमति दी जा सकती है। उनके इस बयान से नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

वाशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया बयान चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप, जो पहले ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की वकालत करते रहे हैं, अब कह रहे हैं कि ईरान को सीमित संख्या में मिसाइलें रखने की अनुमति दी जा सकती है।
जी-7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास मिसाइलें हैं, तो ईरान को भी कुछ मिसाइलें रखने की छूट मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि असली खतरा परमाणु हथियार हैं, न कि पारंपरिक मिसाइलें।
मिसाइलों से ज्यादा परमाणु हथियारों पर फोकस
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि परमाणु हथियार पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं। उन्होंने सऊदी अरब और कतर जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए ईरान को भी कुछ मिसाइल क्षमता रखने की अनुमति दी जा सकती है।
उनका यह रुख पहले की अमेरिकी नीति से अलग माना जा रहा है, जिसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध की मांग की जाती रही थी।
अमेरिका-ईरान MoU पर लगी मुहर
अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने और तनाव कम करने के उद्देश्य से एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं। समझौते में समुद्री यातायात बहाल करने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने और ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता शामिल है।
हालांकि समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे कई देशों और विशेषज्ञों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
मिसाइल कार्यक्रम समझौते से बाहर?
रिपोर्टों के अनुसार, इस अंतरिम समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर स्पष्ट प्रतिबंध शामिल नहीं है। यही कारण है कि इजरायल और कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस समझौते पर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि आर्थिक राहत मिलने के बाद ईरान अपनी मिसाइल और रक्षा क्षमताओं को और मजबूत कर सकता है।
यूरेनियम स्टॉक पर भी उठे सवाल
समझौते के आलोचकों का कहना है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर भी कई प्रश्न अभी अनसुलझे हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अगले 60 दिनों में तकनीकी और कूटनीतिक वार्ता के जरिए इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे तत्काल परमाणु खतरा कम हुआ है। हालांकि स्वतंत्र विशेषज्ञ इस दावे का अलग-अलग आकलन कर रहे हैं।
समझौते के साथ चेतावनी भी
ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता शांति की दिशा में एक अवसर है, लेकिन अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का कितना पालन करते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुले रहने से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिलेगी।
हालांकि समझौते के कई पहलुओं पर अभी भी स्पष्टता नहीं है। ऐसे में अगले दो महीनों की वार्ता यह तय करेगी कि यह समझौता स्थायी शांति की ओर कदम साबित होता है या केवल अस्थायी राहत।




