दिल्ली के असोला अभयारण्य से खुशखबरी! बढ़कर 16 हुई तेंदुओं की आबादी, कैमरों में कैद हो रहे जोड़े
दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की संख्या बढ़कर 16 के करीब पहुंच गई है। कैमरा ट्रैप में तेंदुओं के जोड़े, चीतल, जंगली सूअर और मोरों की बढ़ती मौजूदगी ने वन विभाग को उत्साहित किया है।
नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर एक अच्छी खबर सामने आई है। असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन विभाग को उत्साहित कर दिया है। कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के दिखने और उनकी अनुमानित संख्या 16 तक पहुंचने को अधिकारी बेहतर होते प्राकृतिक आवास और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं।
असोला भाटी में बढ़ी तेंदुओं की संख्या
वन अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2022 में जहां अभयारण्य में तेंदुओं की संख्या लगभग 12 से 14 के बीच आंकी गई थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 16 तक पहुंच गई है। हालांकि विभाग का कहना है कि यह आंकड़ा कैमरा ट्रैप और निगरानी के आधार पर अनुमानित है, जिसकी अंतिम पुष्टि विस्तृत गणना के बाद ही होगी।
कैमरा ट्रैप में बार-बार दिख रहे तेंदुओं के जोड़े
वन विभाग को सबसे अधिक उत्साह इस बात से है कि अभयारण्य के जलाशयों के आसपास तेंदुओं के जोड़े लगातार कैमरों में रिकॉर्ड हो रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तेंदुए सामान्यतः एकांत में रहना पसंद करते हैं और केवल प्रजनन या शावकों की देखभाल के दौरान ही साथ दिखाई देते हैं। ऐसे में जोड़ों का बार-बार दिखना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
चीतल, जंगली सूअर और मोरों की संख्या में भी इजाफा
तेंदुओं के अलावा अभयारण्य में चीतल, जंगली सूअर और मोरों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक अब मोर अभयारण्य के कई हिस्सों में आसानी से देखे जा सकते हैं और कई स्थानों पर झुंड के रूप में नजर आते हैं।
बेहतर हो रहा है पारिस्थितिकी तंत्र
वन विभाग का मानना है कि विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अभयारण्य का पारिस्थितिकी तंत्र पहले से अधिक मजबूत हुआ है। भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की उपलब्धता बढ़ने से वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।
संकेतक प्रजातियां बता रही हैं आवास की स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां किसी भी जंगल की स्थिति का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनकी संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि वन क्षेत्र की गुणवत्ता और जैव विविधता में सुधार हो रहा है।
200 से ज्यादा जलकुंड बने बदलाव की वजह
अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंडों का निर्माण और रखरखाव किया गया है। इससे वन्यजीवों को पूरे साल पानी उपलब्ध हो रहा है। साथ ही वर्षों पहले लगाए गए पौधे अब घने जंगल का रूप ले चुके हैं, जिससे वन्यजीवों को बेहतर आश्रय मिल रहा है।
तेंदुओं के लिए सुरक्षित बन रहा अभयारण्य
चीतल और जंगली सूअरों जैसी शिकार प्रजातियों की बढ़ती संख्या के कारण तेंदुओं के लिए भोजन की उपलब्धता भी बढ़ी है। यही वजह है कि अब कई तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र में अधिक समय बिताते नजर आ रहे हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से दिल्ली और हरियाणा के अरावली जंगलों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में जाना जाता है।




