TMC में भगदड़ तेज! राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका
TMC सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। जानिए इस्तीफे के पीछे की वजहें और इसके राजनीतिक मायने।
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद लगातार नेताओं के असंतोष और इस्तीफों के बीच इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
TMC को लगा एक और बड़ा झटका
तृणमूल कांग्रेस इन दिनों संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। वरिष्ठ राज्यसभा सांसद Sukhendu Sekhar Ray के इस्तीफे के कुछ ही दिनों बाद अब Sushmita Dev ने भी राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत हो सकते हैं।
राज्यसभा चेयरमैन को भेजा इस्तीफा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुष्मिता देव ने राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan को लिखे पत्र में सदस्यता छोड़ने की जानकारी देते हुए इस्तीफा तत्काल स्वीकार करने का अनुरोध किया है। हालांकि, उनके इस फैसले के पीछे की वजहों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब TMC प्रमुख Mamata Banerjee ने हाल ही में Sonia Gandhi से मुलाकात की थी। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व संगठन में टूट और असंतोष को रोकने के प्रयासों में जुटा हुआ है।
कांग्रेस छोड़कर 2021 में हुई थीं TMC में शामिल
सुष्मिता देव राष्ट्रीय राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा रही हैं। वह वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर TMC में शामिल हुई थीं। इसके बाद उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं और वे TMC की प्रमुख प्रवक्ताओं में भी शामिल रहीं।
पार्टी के हालात पर पहले क्या कहा था?
हाल ही में एक बातचीत के दौरान सुष्मिता देव ने TMC कार्यकर्ताओं और नेताओं पर दबाव की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी के विधायकों और कैडर पर विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास जताया था कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी चुनौतियों से उबरने में सक्षम है। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत जनता का समर्थन और उनकी ईमानदार छवि है, जिसके दम पर पार्टी भविष्य में और मजबूत होकर उभर सकती है।
सुखेंदु शेखर रे ने लगाए थे गंभीर आरोप
इससे पहले इस्तीफा देने वाले Sukhendu Sekhar Ray ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया था कि TMC सरकार भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
सुष्मिता देव का इस्तीफा केवल एक संसदीय पद छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। ऐसे समय में जब TMC संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है, यह घटनाक्रम पार्टी के लिए राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके अगले राजनीतिक कदम क्या होते हैं और इसका TMC की रणनीति पर कितना असर पड़ता है।




